Laxmi Shobana

श्रीवादिराजगुरुसार्वभौमविरचित श्रीलक्ष्मीशोभन पद
शोभानवेन्निरे सुररोळु सुभगनिगे
शोभानवेन्नि सुगुणनिगे
शोभानवेन्निरे त्रिविक्रमरायगे
शोभानवेन्नि सुरप्रियगे ॥ शोभाने ॥
लक्ष्मीनारायणर चरणक्के शरणेंबे
पक्षिवाहन्नगेरगुवे
पक्षिवाहन्नगेरगुवे अनुदिन
रक्षिसलि नम्म वधूवरर ॥ शोभाने ॥ ॥ 1 ॥
पालसागरवन्नु लीलेयलि कडेयलु
बाले महलक्षुमि उदिसिदळु
बाले महलक्षुमि उदिसिदळादेवि
पालिसलि नम्म वधूवरर ॥ शोभाने ॥ ॥ 2 ॥
बोम्मन प्रळयदलि तन्नरसियोडगूडि
सुम्मनेयागि मलगिप्प
नम्म नारायणगू ई रम्मेगडिगडिगू
जन्मवेंबुदु अवतार ॥ शोभाने ॥ ॥ 3 ॥
कंबुकंठद सुत्त कट्टिद मंगळसूत्र
अंबुजवेरडु करयुगदि
अंबुजवेरडु करयुगदि धरिसि पी-
तांबरवुट्टु मेरेदळु ॥ 4 ॥
ओंदु करदिंद अभयवनीवळे म-
त्तोंदु कैयिंद वरगळ
कुंदिल्लदानंदसंदोह उणिसुव
इंदिरे नम्म सलहलि ॥ 5 ॥
पळेव कांचिय दाम उलिव किंकिणिगळु
नलिव कालंदुगे घलुकेनलु
नळनळिसुव मुद्दुमोगद चेलुवे लक्ष्मी
सलहलि नम्म वधूवरर ॥ 6 ॥
रन्नद मोलेगट्टु चिन्नदाभरणगळ
चेन्ने महलक्षुमि धरिसिदळे
चेन्ने महलक्षुमि धरिसिदळा देवि तन्न
मन्नेय वधूवरर सलहलि ॥ 7 ॥
कुंभकुचद मेले इंबिट्ट हारगळु
तुंबिगुरुळ मुखकमल
तुंबिगुरुळ मुखकमलद महलक्षुमि जग-
दंबे वधूवरर सलहलि ॥ 8 ॥
मुत्तिन ओलेयन्निट्टळे महलक्ष्मि
कस्तूरितिलक धरिसिदळे
कस्तूरितिलक धरिसिदळा देवि स-
र्वत्र वधूवरर सलहलि ॥ ॥ 9 ॥
अंबुजनयनगळ बिंबाधरद शशि
बिंबदंतेसेव मूगुतिमणिय शशि-
बिंबदंतेसेव मूगुतिमणिय महलक्षुमि
उंबुदकीयलि वधूवरर्गे ॥ 10 ॥
मुत्तिनक्षतेयिट्टु नवरत्नद मुकुटव
नेत्तिय मेले धरिसिदळे
नेत्तिय मेले धरिसिदळा देवि तन्न
भक्तिय जनर सलहलि ॥ 11 ॥
कुंदमंदार जाजिकुसुमगळ वृंदव
चेंदद तुरुबिलि तुरुबिदळे
कुंदणवर्णद कोमले महलक्ष्मि कृपे-
यिंद वधूवरर सलहलि ॥ 12 ॥
एंदेंदू बाडद अरविंदमालेय
इंदिरे पोळेव कोरळल्लि
इंदिरे पोळेव कोरळल्लि धरिसिदळे अव-
ळिंदु वधूवरर सलहलि ॥ 13 ॥
देवांगपट्टेय मेलु होद्दिकेय
भावे महलक्षुमि धरिसिदळे
भावे महलक्षुमि धरिसिदळा देवि तन्न
सेवकजनर सलहलि ॥ 14 ॥
ई लक्षुमिदेविय कालुंगुर घलुकेनलु
लोलाक्षि मेल्लने नडेतंदळु
सालागि कुळ्ळिर्द सुरर सभेय कंडु
आलोचिसिदळु मनदल्लि ॥ 15 ॥
तन्न मक्कळ कुंद ताने पेळुवुदक्के
मन्नदि नाचि महलक्षुमि
तन्नामदिंदलि करेयदे ओब्बोब्बर
उन्नंत दोषगळनेणिसिदळु ॥ 16 ॥
केलवरु तलेयूरि तपगैदु पुण्यव
गळिसिद्दरेनू फलविल्ल
ज्वलिसुव कोपदि शापव कोडुवरु
ललनेयनिवरु ओलिसुवरे? ॥ 17 ॥
एल्ल शास्त्रगळोदि दुर्लभ ज्ञानव
कल्लिसि कोडुव गुरुगळु
बल्लिद धनक्के मरुळागि इब्बरु
सल्लद पुरोहितक्कोळगादरु ॥ 18 ॥
कामनिर्जितनोब्ब कामिनिगे सोतोब्ब
भामिनिय हिंदे हारिदव ॥
कामांधनागि मुनिय कामिनिगैदिदनोब्ब
कामदि गुरुतल्पगामियोब्ब ॥ 19 ॥
नश्वरैश्वर्यव बयसुवनोब्ब पर-
राश्रयिसि बाळुव ईश्वरनोब्ब
हास्यव माडि हल्लुदुरिसिकोंडवनोब्ब अ-
दृश्यांघ्रियोब्ब ओक्कण्णनोब्ब ॥ 20 ॥
मावन कोंदोब्ब मरुळागिहनु गड
हार्वन कोंदोब्ब बळलिद
जीवर कोंदोब्ब कुलगेडेंदेनिसिद
शिवनिंदोब्ब बयलाद ॥ 21 ॥
धर्म उंटोब्बनलि हेम्मेय हेसरिगे
अम्मम्म तक्क गुणविल्ल
क्षम्मेय बिट्टोब्ब नरकदलि जीवर
मर्मव मेट्टि कोलिसुव ॥ 22 ॥
खळनंते ओब्ब तनगे सल्लद भाग्यव
बल्लिदगंजि बरिगैद
दुर्लभ मुक्तिगे दूरवेंदेनिसुव पा-
ताळतळक्के इळिद गड ! ॥ 23 ॥
एल्लरायुष्यव शिंशुमारदेव
सल्लीलेयिंद तोलगिसुव
ओल्ले नानिवर नित्य मुत्तैयेंदु
बल्लवरेन्न भजिसुवरु ॥ 24 ॥
प्रकृतिय गुणदिंद कट्टुवडेदु नाना
विकृतिगोळगागि भवदल्लि
सुखदुःखवुंब बोम्मादि जीवरु
दुःखके दूरळेनिप एनगेणेये ॥ 25 ॥
ओब्बनवन मग मत्तोब्बनवन मोम्म
ओब्बनवनिगे शयनाह
ओब्बनवन पोरुव मत्तिब्बरवनिगंजि
अब्बरदलावाग सुळिवरु ॥ 26 ॥
ओब्बनावन नामकंजि बेच्चुव गड
सर्बरिगाव अमृतव
सर्बरिगाव अमृतवनुणिसुव अव-
नोब्बने निरनिष्ट निरवद्य ॥ 27 ॥
निरनिष्ट निरवद्य एंब श्रुत्यर्थव
ओरेदु नोडलु नरहरिगे
नरकयातने सल्ल दुरितातिदूरनिगे
मरुळ मन बंदंते नुडियदिरु ॥ 28 ॥
ओंदोंदु गुणगळु इद्दावु इवरल्लि
संदणिसिवे बहु दोष
कुंदेळ्ळष्टिल्लद मुकुंदने तनगेंदु
इंदिरे पतिय नेनेदळु ॥ 29 ॥
देवर्षि विप्रर कोंदु तन्नुदरदोळिट्टु
तीविर्द हरिगे दुरितव
भावज्ञरेंबरे आलदेलेय मेले
शिवन लिंगव निलिसुवरे ॥ 30 ॥
हसि-तृषे-जरे-मरण रोगरुजिनगळेंब
असुरपिशाचिगळ भयवेंब
व्यसन बरबारदु एंब नारायणगे
पशु मोदलागि नेनेयदु ॥ 31 ॥
ता दुःखियादरे सुरर रतिय कळेदु
मोदवीवुदके धरेगागि
माधव बाहने केसरोळु मुळुगिदव परर
बाधिप केसर बिडिसुवने? ॥ 32 ॥
बोम्मनालयदल्लि इद्दवगे लयवुंटे ?
जन्म लयविल्लदवनिगे ?
अम्मियनुणिसिद्द यशोदेयागिद्दळे ?
अम्म इवगे हसितृषेयुंटे ? ॥ 33 ॥
आग भक्ष्यभोज्यवित्तु पूजिसुव
योगिगळुंटे? धनधान्य
आग दोरकोंबुदे? पाक माडुव वह्नि म-
त्तागलेल्लिहुदु? विचारिसिरो ॥ 34 ॥
रोगवनीव वात पित्त श्लेष्म
आग कूडुवुदे? रमेयोडने
भोगिसुववगे दुरितव नेनेवरे?
ई गुणनिधिगे एणेयुंटे? ॥ 35 ॥
रम्मेदेवियरनप्पिकोंडिप्पुदु
रम्मेयरसगे रति काणिरो
अम्मोघवीर्यवु चलिसिदरे प्रळयदलि
कुम्मारर् याके जनिसरु ? ॥ 36 ॥
एकत्र निर्णीत शास्त्रार्थ परत्रापि
बेकेंब न्यायव तिळिदुको
श्रीकृष्णनोब्बने सर्वदोषक्के सि-
लुकनेंबोदु सलहलिके ॥ 37 ॥
एल्ल जगव नुंगि दक्किसिकोंडवगे
सल्लदु रोगरुजिनवु
बल्ल वैद्यर केळि अजीर्ति मूलवल्ल-
दिल्ल समस्त रुजिनवु ॥ 38 ॥
इंथा मूरुतिय ओळगोंब नरक बहु-
भ्रांत नीनेल्लिंद तोरिसुवेलो ?
संतेय मरुळ होगेलो निन्न मात
संतरु केळि सोगसरु ॥ 39 ॥
श्रीनारायणर जननिजनकर
नानेंब वादि नुडियेलो
जाणरदरिंदरिय मूलरूपव तोरि
श्रीनारसिंहन अवतार ॥ 40 ॥
अंबुधिय उदकदलि ओडेदु मूडिद कूर्म
एंब श्रीहरिय पितनारु ?
एंब श्रीहरिय पितनारु अदरिंद स्व-
यंभुगळेल्ल अवतार ॥ 41 ॥
देवकिय गर्भदलि देवनवतरिसिद
भाववनु बल्ल विवेकिगळु
ई वसुधेयोळगे कृष्णगे जन्मव
आव परियल्लि नुडिवेयो? ॥ 42 ॥
आवळिसुवाग यशोदादेविगे
देव तन्नोळगे हुदुगिद्द
भुवनवेल्लव तोरिद्दुदिल्लवे ?
आ विष्णु गर्भदोळगडगुवने ? ॥ 43 ॥
आनेय मानदलि अडगिसिदवरुंटे ?
अनेक कोटि अजांडव
अणुरोमकूपदलि आळ्द श्रीहरिय
जननिजठरवु ओळगोंबुदे ॥ 44 ॥
अदरिंद कृष्णनिगे जन्मवेंबुदु सल्ल
मदननिवन कुमारनु
कदनदि कणेगळ इवनेदेगेसेवने ?
सुदतेरिगिवनेंतु सिलुकुवने? ॥ 45 ॥
अदरिंद कृष्णनिगे परनारीसंगव को-
विदराद बुधरु नुडिवरे?
सदरवे ई मातु ? सर्ववेदंगळु
मुददिंद तावु स्तुतिसुववु ॥ 46 ॥
एंद भागवतद चेंदद मातनु
मंद मानव मनसिगे
तंदुको जगके कैवल्यवीव मु-
कुंदगे कुंदु कोरते सल्ल ॥ 47 ॥
हत्तु वर्षद केळगे मक्कळाटिकेयल्लि
चित्त स्त्रीयरिगे एरगुवुदे ?
अर्तियिंदर्चिसिद गोकुलद कन्येयर
सत्यसंकल्प बेरेतिद्द ॥ 48 ॥
हत्तु मत्तारु सासिर स्त्रीयरल्लि
हत्तु हत्तेनिप क्रमदिंद
पुत्रर वीर्यदलि सृष्टिसिदवरुंटे?
अर्तिय सृष्टि हरिगिदु ॥ 49 ॥
रोम रोम कूप कोटिवृकंगळ
निर्मिसि गोपालर तेरळिसिद
नम्म श्रीकृष्णनु मक्कळ सृजिसुव म-
हिम्मे बल्लवरिगे सलहलिके ॥ 50 ॥
मण्णनेके मेद्देयेंब यशोदेगे
सण्ण बायोळगे जगंगळ
कण्णारे तोरिद नम्म श्रीकृष्णन
घन्नते बल्लवरिगे सलहलिके ॥ 51 ॥
नारद-सनकादि मोदलाद योगिगळु
नारियरिगे मरुळादरे
ओरंते श्रीकृष्णनडिगडिगेरगुवरे?
आराधिसुत्त भजिसुवरे? ॥ 52 ॥
अंबुजसंभव त्रियंबक मोदलाद
नंबिदवरिगे वरवित्त
संभ्रमद सुररु एळ्ळष्टु कोपक्के
इंबिद्दवरिवन भजिसुवरे? ॥ 53 ॥
आवनंगुष्ठव तोळेद गंगादेवि
पावनळेनिसि मेरेयळे ?
जीवन सेरुव पापव कळेवळु
ई वासुदेवगे एणेयुंटे ? ॥ 54 ॥
किल्बिषविद्दरे अग्रपूजेयनु
सर्बरायर सभेयोळगे
उब्बिद मनदिंद धर्मज माडुवने ?
कोब्बदिरेलो परवादि ॥ 55 ॥
साविल्लद हरिगे नरकयातने सल्ल
जीवंतरिगे नरकदलि
नोवनीवने निम्म यमदेवनु
गोव नी हरिय गुणवरिय ! ॥ 56 ॥
नरकवाळुव यमधर्मराय तन्न
नरजन्मदोळगे पोरळिसि
मरळि तन्नरकदलि पोरळिसि कोलुवनु ?
कुरु निन्न कुहक कोळदल्लि ॥ 57 ॥
बोम्मन नूरु वरुष परियंत प्रळयदलि
सुम्मनेयागि मलगिर्द
नम्म नारायणगे हसि-तृषे-जरे-मरण दु-
ष्कर्म दुःखंगळु तोडसुवरे ? ॥ 58 ॥
रक्कसरस्त्रगळिंद गायवडेयद
अक्षयकायद सिरिकृष्ण
तुच्छ यमभटर शस्त्रकळुकुवनल्ल
हुच्च नी हरिय गुणवरिय ॥ 59 ॥
किच्च नुंगिदनु नम्म श्रीकृष्णनु
तुच्छ नरकदोळु अनलनिगे
बेच्चुवनल्ल अदरिंदिवगे नरक
मेच्चुवरल्ल बुधरेल्ल ॥ 60 ॥
मनेयल्लि क्षमेय ताळ्द वीरभट
रणरंगदल्लि क्षमिसुवने
अणुवागि नम्म हितके मनदोळगिन कृष्ण
मुनिव कालक्के महत्ताह ॥ 61 ॥
ताय पोट्टेयिंद मूलरूपव तोरि
आयुधसहित पोरवंट
न्यायकोविदरु पुट्टिदनेंबरे ?
बायिगे बंदंते बोगळदिरु ॥ 62 ॥
उट्ट पीतांबर तोट्ट भूषणंगळु
इट्ट नवरत्नद मुकुटवु
मेट्टिद कुरुह एदेयल्लि तोरिद श्री-
विठ्ठल पुट्टिदनेनबहुदे ? ॥ 63 ॥
ऋषभहंसमेषमहिषमूषकवाहनवेरि मा-
निसरंते सुळिव सुररेल्ल
एसेव देवेशानर सहसक्के मणिदरु
कुसुमनाभनिगे सरियुंटे ? ॥ 64 ॥
ओंदोंदु गुणगळु इद्दावु इवरल्लि
संदणिसिवे बहुदोष
कुंदेळ्ळष्टिल्लद मुकुंदने तनगेंदु
इंदिरे पतिय नेनेदळु ॥ 65 ॥
इंतु चिंतिसि रमे संत रामन पदव
संतोषमनदि नेनेवुत्त
संतोषमनदि नेनेवुत्त तन्न श्री-
कांतनिद्देडेगे नडेदळु ॥ 66 ॥
कंदर्पकोटिगळ गेलुव सौंदर्यद
चेंदवागिद्द चेलुवन
इंदिरे कंडु इवने तनगे पति -
येंदवन बळिगे नडेदळु ॥ 67 ॥
इत्तरद सुरर सुत्त नोडुत्त लक्ष्मि
चित्तव कोडदे नसुनगुत
चित्तव कोडदे नसुनगुत बंदु पुरु-
षोत्तमन कंडु नमिसिदळु ॥ 68 ॥
नानाकुसुमगळिंद माडिद मालेय
श्रीनारि तन्न करदल्लि
पीनकंधरद त्रिविक्रमरायन कोर-
ळिन मेलिट्टु नमिसिदळु ॥ 69 ॥
उट्ट पोंबट्टेय तोट्टाभरणगळु
इट्ट नवरत्नद मुकुटवु
दुष्टमर्दननेंब कडेय पेंडेगळ
वट्टिद्द हरिगे वधुवादळु ॥ 70 ॥
कोंबु चेंगहळेगळु ताळमद्दळेगळु
तंबटे भेरि पटहगळु
भों भों एंब शंख डोळ्ळु मौरिगळु
अंबुधिय मनेयल्लेसेदवु ॥ 71 ॥
अर्घ्य पाद्याचमन मोदलाद षोडश-
नर्घ्य पूजेयित्तनळियंगे
ओग्गिद मनदिंद धारेयेरेदने सिंधु
सद्गतियित्तु सलहेंद ॥ 72 ॥
वेदोक्तमंत्र पेळि वसिष्ठ-नारद मोद-
लाद मुनींद्ररु मुददिंद
वधूवरर मेले शोभनदक्षतेयनु
मोदवीवुत्त तळिदरु ॥ 73 ॥
संभ्रमदिंदंबरदि दुंदुभि मोळगलु
तुंबुरु नारदरु तुतिसुत्त
तुंबुरुनारदरु तुतिसुत्त पाडिदरु पी-
तांबरधरन महिमेय ॥ 74 ॥
देवनारियरेल्ल बंदोदगि पाठकरु
ओवि पाडुत्त कुणिदरु
देवतरुविन हूविन मळेगळ
श्रीवरन मेले करेदरु ॥ 75 ॥
मुत्तुरत्नगळिंद तेत्तिसिद हसेय नव-
रत्नमंटपदि पसरिसि नव-
रत्नमंटपदि पसरिसि कृष्णन
मुत्तैयरेल्ल करेदरु ॥ 76 ॥
शेषशयनने बा दोषदूरने बा
भासुरकाय हरिये बा
भासुरकाय हरिये बा श्रीकृष्ण वि-
लासदिंदेम्म हसेगे बा ॥ 77 ॥
कंजलोचनने बा मंजुळमूर्तिये बा
कुंजरवरदायकने बा
कुंजरवरदायकने बा श्रीकृष्ण नि-
रंजन नम्म हसेगे बा ॥ 78 ॥
आदिकालदल्लि आलदेलेय मेले
श्रीदेवियरोडने पवडिसिद
श्रीदेवियरोडने पवडिसिद श्रीकृष्ण
मोददिंदेम्म हसेगे बा ॥ 79 ॥
आदिकारणनागि आग मलगिद्दु
मोद जीवर तन्न उदरदलि
मोद जीवर तन्नुदरदलि इंबिट्ट अ-
नादिमूरुतिये हसेगे बा ॥ 80 ॥
चिन्मयवेनिप निम्म मनेगळल्लि ज्यो-
तिर्मयवाद पद्मदल्लि
रम्मेयरोडगूडि रमिसुव श्रीकृष्ण
नम्म मनेय हसेगे बा ॥ 81 ॥
नानावतारदलि नंबिद सुररिगे
आनंदवीव करुणि बा
आनंदवीव करुणि बा श्रीकृष्ण
श्रीनारियरोडने हसेगे बा ॥ 82 ॥
बोम्मन मनेयल्लि रन्नपीठदि कुळितु
ओम्मनदि नेहव माडुव
निर्मलपूजेय कैगोंड श्रीकृष्ण पर-
बोम्ममूरुतिये हसेगे बा ॥ 83 ॥
मुख्यप्राणन मनेयल्लि भारतियाग-
लिक्कि बडिसिद रसायनव
सक्करेगूडिद पायस सवियुव
रक्कसवैरिये हसेगे बा ॥ 84 ॥
रुद्रन मनेयल्लि रुद्राणिदेवियरु
भद्रमंटपदि कुळ्ळिरिसि
स्वाद्वन्नगळनु बडिसलु कैगोंब
मुद्दु नरसिंह हसेगे बा ॥ 85 ॥
गरुडन मेलेरि गगनमार्गदल्लि
तरतरदि स्तुतिप सुरस्त्रीयर
मेरेव गंधर्वर गानव सवियुव
नरहरि नम्म हसेगे बा ॥ 86 ॥
निम्मण्णन मनेय सुधर्मसभेयल्लि
उम्मेयरस नमिसिद
धर्मरक्षकनेनिप कृष्ण कृपेयिंद प-
रम्म मूरुतिये हसेगे बा ॥ 87 ॥
इंद्रन मनेग्होगि अदितिगे कुंडलवित्तु
अंदद पूजेय कैगोंडु
अंदद पूजेय कैगोंडु सुरतरुव
इंदिरेगित्त हरिये बा ॥ 88 ॥
निम्म नेनेव मुनिहृदयदलि नेलसिद
धर्मरक्षकनेनिसुव
सम्मतवागिद्द पूजेय कैगोंब नि-
स्सीममहिम हसेगे बा ॥ 89 ॥
मुत्तिन सत्तिगे नवरत्नद चामर
सुत्त नलिव सुरस्त्रीयर
नृत्यव नोडुव चित्रवाद्यंगळ सं-
पत्तिन हरिये हसेगे बा ॥ 90 ॥
एनलु नगुत बंदु हसेय मेले
वनिते लक्षुमियोडगूडि
अनंतवैभवदि कुळित कृष्णगे नाल्कु
दिनदुत्सवव नडेसिदरु ॥ 91 ॥
अत्तेरेनिप गंगे यमुने सरस्वति भा-
रत्ति मोदलाद सुरस्त्रीयरु
मुत्तिनाक्षतेयनु शोभनवेनुत त-
म्मर्तियळियगे तळिदरु ॥ 92 ॥
रत्नदारतिगे सुत्तमुत्तने तुंबि
मुत्तैयरेल्ल धवळद
मुत्तैयरेल्ल धवळद पदन पा-
डुत्तलेत्तिदरे सिरिवरगे ॥ 93 ॥
बोम्म तन्नरसि कूडे बंदेरगिद
उम्मेयरस नमिसिद
अम्मररेल्लरु बगेबगे उडुगोरेगळ
रम्मेयरसगे सलिसिदरु ॥ 94 ॥
सत्यलोकद बोम्म कौस्तुभरत्नवनित्त
मुक्तसुररु मुददिंद
मुत्तिन कंठीसर मुख्यप्राणनित्त
मस्तकमणिय शिवनित्त ॥ 95 ॥
तन्नरसि कूडे सविनुडि नुडिवाग व-
दन्नदल्लिद्दग्नि केडदंते
वह्निप्रतिष्ठेय माडि अवनोळगिद्द
तन्नाहुतियित्त सुररिगे ॥ 96 ॥
कोब्बिद खळरोडिसि अमृतान्न ऊटक्के
उब्बिद हरुषदि उणिसलु
उब्बिद हरुषदि उणिसबेकेंदु सिंधु
सर्बरिगेडेय माडिसिद ॥ 97 ॥
मावन मनेयल्लि देवरिगौतणव दा-
नवरु केडिसदे बिडरेंदु दा-
नवरु केडिसदे बिडरेंदु श्रीकृष्ण
देव स्त्रीवेषव धरिसिद ॥ 98 ॥
तन्न सौंदर्यदिंदन्नंतमडियाद ला-
वण्यदि मेरेव निजपतिय
हेण्णुरूपव कंडु कन्ये महलक्षुमि इव-
गन्यरेकेंदु बेरगादळु ॥ 99 ॥
लावण्यमयवाद हरिय स्त्रीवेषक्के
भावुकरेल्ल मरुळागे
मावर सुधेय क्रमदिंद बडिसि तन्न
सेवक सुररिगुणिसिद ॥ 100 ॥
नागन मेले ता मलगिद्दाग
आगले जगव जतनदि
आगले जगव जतनदि धरिसेंदु
नागबलिय नडेसिद ॥ 101 ॥
क्षुधेय कळेव नवरत्नद मालेय
मुददिंद वारिधि विधिगित्त
चदुरहारव वायुदेवरिगित्त
विधुविन कलेय शिवगित्त ॥ 102 ॥
शक्र मोदलाद दिक्पालकरिगे
सोक्किद चौदंत गजंगळ
उक्किद मनदिंद कोट्ट वरुण मदु-
मक्कळायुष्यव बेळेसेंद ॥ 103 ॥
मत्ते देवेंद्रगे पारिजातवनित्त
चित्तव सेळेवप्सरस्त्रीयर
हत्तु साविर कोट्ट वरुणदेव हरि-
भक्तिय मनदि बेळेसेंद ॥ 104 ॥
पोळेव नवरत्नद राशिय तेगेतेगेदु
उळिद अमररिगे सलिसिद
उळिद अमररिगे सलिसिद समुद्र
कळुहिदनवरवर मनेगळिगे ॥ 105 ॥
उन्नंत नवरत्नमयवाद अरमनेय
चेन्नेमगळिंद विरचिसि
तन्न अळियगे स्थिरवागि माडिकोट्टु
इन्नोंदु कडेयडि इडदंते ॥ 106 ॥
हयवदन तन्न प्रियळाद लक्षुमिगे
जयवित्त क्षीरांबुधियल्लि
जयवित्त क्षीरांबुधियल्लि श्रीकृष्ण
दयदि नम्मेल्लर सलहलि ॥ 107 ॥
ई पदन माडिद वादिराजेंद्रमुनिगे
श्रीपतियाद हयवदन
तापव कळेदु तन्न श्रीचरण स-
मीपदल्लिट्टु सलहलि ॥ 108 ॥
इंतु स्वप्नदल्लि कोंडाडिसिकोंड लक्ष्मी-
कांतन कंदनेनिसुव
संतर मेच्चिन वादिराजेंद्र मुनि
पंथदि पेळिद पदविदु ॥ 109 ॥
श्रीयरस हयवदनप्रिय वादिराज-
राय रचिसिद पदविदु
आयुष्य भविष्य दिनदिनके हेच्चुवुदु नि-
रायासदिंद सुखिपरु ॥ 110 ॥
बोम्मन दिनदल्लि ओम्मोम्मे ई मदुवे
क्रम्मदि माडि विनोदिसुव
नम्म नारायणगू ई रम्मेगडिगडिगू असु-
रम्मोहनवे नरनटने ॥ 111 ॥
मदुवेय मनेयल्लि ई पदव पाडिदरे
मदुमक्कळिगे मुदवहुदु
वधुगळिगे वालेभाग्य दिनदिनके हेच्चुवुदु
मदननय्यन कृपेयिंद ॥ 112 ॥
शोभानवेन्निरे सुररोळु सुभगनिगे
शोभानवेन्नि सुगुणनिगे
शोभानवेन्निरे त्रिविक्रमरायगे
शोभानवेन्नि सुरप्रियगे ॥ शोभाने ॥ ॥ 113 ॥
॥ इति श्रीमद्वादिराजयतिविरचित श्रीलक्ष्मीशोभनपद ॥
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आरति
शोभानवेन्निरे सुररोळु सुभगनिगे
शोभानवेन्नि सुगुणनिगे
शोभानवेन्निरे त्रिविक्रमरायगे
शोभानवेन्नि सुरप्रियगे ॥ शोभाने ॥ ॥ प ॥
हडगिनोळगिंद बंद कडु मुद्दु श्रीकृष्णगे
कडेगोलु नेण पिडिदने ॥
कडगोलु नेण पिडिदने देवकिय
तनयगारुतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
आचार्यर कैयिंद अधिकपूजेयगोंब
कांते लक्ष्मिय अरसने ॥
कांते लक्ष्मिय अरसने श्रीकृष्णगे
कांचनदारतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
मध्वसरोवरदि शुद्ध पूजेय कोंब
मुद्दु रुक्मिणियरसने ॥
मुद्दु रुक्मिणिय अरसने श्रीकृष्णगे
मुत्तिनारतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
पांडवर प्रियने चाणूरमर्दनने
सत्यभामेय अरसने ॥
सत्यभामेय अरसने श्रीकृष्णगे
नवरत्नदारतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
सोदर मावन मधुरेलि मडुहिद
तायिय सेरेय बिडिसिद ॥
तायिय सेरेय बिडिसिद हयवदन
देवगारतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
मुत्तैयरेल्लरू मुत्तिनारुति एत्ति
हत्तावतारद हयवदनग
हत्तावतारद हयवदन देवग
होस मुत्तिनारुतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
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श्रीश्रीपादराजविरचित
श्री मध्वनाम
जय जय जगत्त्राण जगदोळगे सुत्राण
अखिलगुणसद्धाम मध्वनाम ॥प॥
आव कच्चपरूपदिंदलंडोदकव
ओवि धरिसिद शेषमूरुतियनु
आववन बलविडिदु हरिय सुररैय्दुवरु
आ वायु नम्म कुलगुरुरायनु ॥1॥
आववनु देहदोळगिरलु हरि नेलेसिहनु
आववनु तोलगे हरि ता तोलगुव
आववनु देहदोळहोरगे नियामकनु
आ वायु नम्म कुलगुरुरायनु ॥2॥
करणाभिमानि सुररु देहव बिडलु
कुरुड किवुड मूकनेंदेनिसुव
परममुख्यप्राण तोलगला देहवनु
अरितु पेणवेंदु पेळ्वरु बुधजनरु ॥3॥
सुररोळगे नररोळगे सर्वभूतगळोळगे
परतरनेनिसि नियामिसि नेलेसिहनु
हरियनल्लदे बगेय अन्यरनु लोकदोळु
गुरुकुलतिलक मुख्य पवमाननु ॥4॥
त्रेतेयलि रघुपतिय सेवे माडुवेनेंदु
वातसुत हनुमंतनेंदेनिसिद
पोतभावदि तरणिबिंबक्के लंघिसिद
ईतगेणेगाणे मूर्लोकदोळगे ॥5॥
तरणिगभिमुखनागि शब्दशास्त्रव रचिसि
उरवणिसि हिंदु मुंदागि नडेद
परम पवमानसुत उदयास्तशैलगळ
भरदि ऐदिद ईतगुपमेयुंटे ॥6॥
अखिलवेदगळ सारव धरिसि मुन्निवनु
निखिलव्याकरणगळ इव पेळिद
मुखदल्लि किंचिदपशब्द इवगिल्लेंदु
मुख्यप्राणननु रामननुकरिसिद ॥7॥
तरणिसुतननु काय्दु शरधियनु नेरेदाटि
धरणिसुतेयळ कंडु दनुजरोडने
भरदि रणवने माडि गेलिदु दिव्यास्त्रगळ
उरुहि लंकेय बंद हनुमंतनु ॥8॥
हरिगे चूडामणियनित्तु हरिगळ कूडि
शरधियनु कट्टि बलु रक्कसरनु
ओरेसि रणदलि दशशिरन हुडिगट्टि ता
मेरेद हनुमंत बलवंत धीर ॥9॥
उरगबंधके सिलुकि कपिवररु मै मरेये
तरणिकुलतिलकनाज्ञेय ताळिद
गिरिसहित संजीवनव कित्तु तंदित्त
धरेयोळगे सरियुंटे हनुमंतगे ॥10॥
विजय रघुपति मेच्चि धरणिसुतेयळिगीये
भजिसि मौक्त्तिकद हारवनु पडेद
अजपदवियनु राम कोडुवेनेने हनुमंत
निजभकुतियने बेडि वरव पडेद ॥11॥
आ मारुतने भीमनेनिसि द्वापरदल्लि
सोमकुलदलि जनिसि पार्थरोडने
भीम विक्रम रक्कसर मुरिदट्टिद
आ महिम नम्म कुलगुरुरायनु ॥12॥
करदिंद शिशुभावनाद भीमन बिडलु
गिरियोडेदु शतशृंगवेंदेनिसितु
हरिगळा हरिगळिं करिगळा करिगळिं
अरेव वीरनिगे सुर-नररु सरिये ॥13॥
कुरुप गरळवनिक्के नेरेयुंडु तेगिदा
उरगगळ मेल्बिडलु अदनोरसिद
अरगिनरमनेयल्लि उरियनिक्कलु वीर
धरिसि जाह्नविगोय्द तन्ननुजर ॥14॥
अल्लिर्द बक-हिडिंबकरेंब रक्कसर
निल्लदोरेसिद लोककंटकरनु
बल्लिदसुरर गेलिदु द्रौपदिय कैविडिदु
एल्ल सुजनरिगे हरुषव तोरिद ॥15॥
राजकुलवज्रनेनिसिद मागधन सीळि
राजसूययागवनु माडिसिदनु
आजियोळु कौरवर बलव सवरुवेनेंदु
मूजगवरिये कंकण कट्टिद ॥16॥
माननिधि द्रौपदिय मनदिंगितवनरितु
दानवर सवरबेकेंदु बेग
काननव पोक्कु किर्मीरादिगळ तरिदु
मानिनिगे सौगंधिकवने तंद ॥17॥
दुरुळ कीचकनु ता द्रौपदिय चलुविकेगे
मरुळागि करकरेय माडलवना
गरडिमनेयोळु बरसि ओरेसि अवनन्वयद
कुरुपनट्टिद मल्लरनु सवरिद ॥18॥
वैरि दुश्शासनन रणदल्लि एडेगेडहि
वीर नरहरिय लीलेय तोरिद
कौरवर बल सवरि वैरिगळ नेग्गोत्ति
ओरंते कौरवन मुरिदु मेरेद ॥19॥
गुरुसुतनु संगरदि नारायणास्त्रवनु
उरवणिसि बिडलु शस्त्रव बिसुटरु
हरिकृपेय पडेदिर्द भीम हुंकारदलि
हरिय दिव्यास्त्रवनु नेरे अट्टिद ॥20॥
नारिरोदन केळि मनमरुगि गुरुसुतन
हार्‌हिडिदु शिरोरत्न कित्तु तेगेद
नीरोळगिद्द दुर्योधनन होरगेडहि
ऊरुद्वयव तन्न गदेयिंद मुरिद ॥21॥
चंडविक्रमनु गदेगोंडु रणदि भू-
मंडलदोळिदिरांत खळरनेल्ला
हिंडि बिसुटिह वृकोदरन प्रतापवनु
कंडु निल्लुवरारु त्रिभुवनदोळु ॥22॥
दानवरु कलियुगदोळवतरिसि विबुधरोळु
वेनन मतवनरुहलदनरितु
ज्ञानि ता पवमान भूतळदोळवतरिसि
माननिधि मध्वाख्यनेंदेनिसिद ॥23॥
अर्भकतनदोळैदि बदरियलि मध्वमुनि
निर्भयदि सकलशास्त्रव पठिसिद
उर्वियोळु माये बीरलु तत्त्वमार्गवनु
सर्व सुजनरिगे तोरि मेरेदा ॥24॥
सर्वेश हरि विश्व एल्ल ता पुसियेंब
दुर्वादिगळ मतवने खंडिसि
सर्वेश हरि विश्व सत्यवेंदरुहिदा
शर्वादिगीर्वाणसंततियलि ॥25॥
एकविंशति कुभाष्यगळ बेरनु तरिदु
श्रीकरार्चितनोलुमे शास्त्र रचिसि
लोकत्रयदोळिद्द सुररु आलिसुवंते
आ कमलनाभयतिनिकरकोरेद ॥26॥
बदरिकाश्रमके पुनरपियैदि व्यासमुनि
पदकेरगि अखिळवेदार्थगळनु
पदुमनाभन मुखदि तिळिदु ब्रह्मत्व
ऐदिद मध्वमुनिरायगभिवंदिपे ॥27॥
जय जयतु दुर्वादिमततिमिरमार्तांड
जय जयतु वादिगजपंचानन
जय जयतु चार्वाकगर्वपर्वतकुलिश
जय जय जगन्नाथ मध्वनाथ ॥28॥
तुंगकुल गुरुवरन हृत्कमलदोळु नेलेसि
भंगविल्लद सुखव सुजनकेल्ल
हिंगदे कोडुव नम्म मध्वांतरात्मकनु
रंगविठलनेंदु नेरे सारिरै ॥29॥
॥ श्री मध्वनाम संपूर्ण ॥
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श्रीजगन्नाथदासविरचित फलस्तुति
सोमसूर्योपरागदि गोसहस्रगळ
भूमिदेवरिगे सुरनदिय तटदि
श्रीमुकुंदार्पणवेनुत कोट्ट फलवक्कु
ई मध्वनाम बरेदोदिदरिगे ॥1॥
पुत्ररिल्लदवरु सत्पुत्ररैदुवरु
सर्वत्रदलि दिग्विजयवहुदु सकल
शत्रुगळु केडुवरपमृत्यु बरलंजुवुदु
सूत्रनामकन संस्तुति मात्रदि ॥2॥
श्रीपादराय पेळिद मध्वनाम सं-
तापकळेदखिळ सौख्यवनीवुदु
श्रीपति जगन्नाथविठलन तोरि भव-
कूपारदिंद कडे हायिसुवुदु ॥3॥
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श्री विजयदास विरचित
श्रीधन्वंतरि सुळादि
ध्रुव ताळ
आयु वृद्धियागुवुदु श्रेयस्सु बरुवुदु
काय निर्मलिन कारणवाहुदु.
माया हिंदागुवुदु नानारोगद बीज
बेयिसि कळेवुदु वेगादिंदा
नायि मोदलाद कुत्सित देहनि-
कायव तेत्तु दुष्कर्मदिंद
क्रीयमाण संचित भरितवागिद्द दुःख
हेयसागरदोळु बिद्दु बळलि,
नोयिसिकोंडु, नेलेगाणदे ओम्मे तन्न
बायल्लि वैद्यमूर्ति धन्वंतरि
राया राजौषधि नियामक कर्ता
श्रीयरसनेंदु तुतिसलागि
तायि ओदगि बंदु बालन्न साकिदंते
नोयगोडदे नम्मन्नु पालिपा
ध्येया देवादिगळिगे धर्मज्ञगुणसांद्र
श्रेयस्सु कोडुवनु भजकरिगे
मायामात्रदिंद जगवेल्ल व्यापिसि स-
न्न्यायवंतनागि चेष्टे माळ्प
वायुवंदित नित्य विजयविठलरेया
प्रीयनु काणो नमगे अनादिरोग कळेव ॥1॥
मट्ट ताळ
धन्वंतरि श्री धन्वंतरि एंदु
सन्नुतिसि सतताविच्छिन्न ज्ञानदिंद
निन्नव निन्नवनेंदु घन्नतियलि नेनेव
मन्नुज भुवन्नदोळु धन्यनु धन्यनेन्नि
घन्नमूरुति ओलिव विजयविठल सुप्र-
सन्न सत्यनेंदु बण्णिसु बहुविधदि ॥2॥
त्रिपुट ताळ
शशिकुलोद्भव दीर्घतमनंदन देव,
शशिवर्णप्रकाश प्रभुवे विभुवे
शशिमंडलसंस्थित कलश कलशपाणि
बिसजलोचन आश्विनेयवंद्य !
शशिगर्भभूरुह लते ताप ओडिसुव
औषधितुळसिजनक वासुदेव!
असुरनिर्जरतति नेरेदु गिरिय तंदु
मिसुकदे महोदधि मथिसलागि
नसुनगुत पुट्टिदे पीयूषघट धरिसि
असमदैववे ! निन्न महिमेगे नमो नमो
बिसजसंभव रुद्र मोदलाद देवता-
ऋषिनिकर निन्न कोंडाडुवुदु !
दशदिशदलि मेरेव विजयविठल
भिषकु असु इंद्रियंगळ रोगनिवारण ॥3॥
अट्ट ताळ
शरणु शरणु धन्वंतरि तमोगुणनाशा
शरणु आर्तजनपरिपालक, देव-
तरुवे, भवतापहरण दितिसुत-
हरण मोहकलीला परमपूरण ब्रह्म, ब्रह्म उद्धारक,
उरुपराक्रम उरुपराक्रम उरगशायि
वरकिरीट, महामणिकुंडलकर्ण,
मिरुगुव हस्तकंकण, हारपदक,
वरकांचीपीतांबर, चरणभूषा,
सिरिवत्सलांछन विजयविठलरेय
तरणिगातर ज्ञानमुद्रांकित हस्त ॥4॥
एळुवागलि, मत्ते तिरुगुवागलि,
बीळुवागलि, निंदु कुळ्ळिरुवागलि,
हेळुवागलि वार्ते केळुवागलि, करेदु
पेळुवागलि, पोगि सत्कर्म माडुवाग
बाळुवागलि, भोजन नाना षड्रस स-
म्मेळवागलि, मत्ते पुत्रादिगळोडने
खेळवागलि मनुज मरेयदे ओम्मे तन्न
नालगे कोनेयल्लि धन्वंतरि एंदु
काल अकालदल्लि स्मरिसिद मानवगे
व्याळेव्याळेगे बाहो भवबीजपरिहार
नीलमेघश्याम विजयविठलरेय
वालगकोडुवनु मुक्तर संगदल्लि ॥5॥
जते
धं धन्वंतरि एंदु प्रणवपूर्वकदिंद
वंदिसि नेनेयलु विजयविठल ओलिवा ॥
----------------
श्रीविजयदासविरचित
श्रीनरसिंहसुळादि
ध्रुवताळ
वीरसिंहने नारसिंहने दयपारा-
वारने भय निवारण निर्गुण
सारिदवर संसार वृक्षद मूल
बेररसि कीळुव बिरिदु भयंकर
घोरावतार कराळवदन अ-
घोर दुरित संहार मायाकार
क्रूर दैत्यर शोककारण उदुभव
ईरेळु भुवन सागरदोडिया
आ रौद्रनामा विजयविठ्ठल नरसिंग
वीररसातुंग कारुण्यपांग ॥1॥
मट्टताळ
मगुविन रक्कसनु हगलिरुळु बिडदे
हगेयिंदलि होय्दु नगपन्नग वनधि
गगन मिगिलाद अगणित बाधेयलि
नेगेदु ओगदु सावु बगेदु कोल्लुतिरलु
जगदवल्लभने सगुणानादिगने
निगमावंदितने पोगळिद भकुतर
तगलि तोलगनेंदू मिगे कूगुतलिरलु
युग युगदोळु दयाळुगळ देवर देव
युगादिकृते नामा विजय विठ्ठल हो, हो
युगळ करव मुगिदु मगुवु मोरेयिडलु ॥2॥
रूपक ताळ
केळिदाक्षणदल्लि लालिसि भक्तन्न
मौळिवेगदलि पालिसुवेनेंदु
ताळि संतोषव तूळि तुंबिदंते
मूलोकद पतियालयदिंद सु
शील दुर्लभनाम विजयविठ्ठल पंच-
मौळि मानव कंभ सीळि मूडिद देव ॥3॥
झंपिताळ
लट लटा लटलटा लटकिसि वनजांड
कटह पट पट पटुत्कटदि बिच्चुतिरलु
पुट पुटा पुटनेगेदु चीरि हारुत्त प-
ल्कट कटा कट कडिदु रोषदिंद
मिटि मिटि मिटने रक्ताक्षियल्लि नोडि
तटित्कोटि उर्भटगे आर्भटवागिरलु
कुटिलरहित व्यक्त विजयविठ्ठल शक्त
धिट निटिलनेत्र सुरकटकपरिपाला ॥4॥
त्रिविडिताळ
बोब्बिरिये वीरध्वनियिंद तनिगिडि
हब्बि मुंजोणि उरि होरेद्दु सुत्ते
उब्बस रविगागे, अब्जांड नडुगुतिरे
अब्दिसपुत उक्कि होरचल्लि बरुतिरे
अब्जभवादिगळु तब्बिब्बुगोंडरु
अब्बरवेनेनुत नभद गूळेयु तगिये
शब्द तुंबितु अव्याकृताकाश परियंत
निब्बर तरुगिरि जररिसलु
ओब्बरिगोशवल्लद नम्मा विजयविठ्ठल
इब्बगेयागि कंभदिंद पोरमट्ट ॥5॥
अट्टताळ
घुडि घुडिसुत कोटि सिडिलु गिरिगे बंदु
होडेदंते चीरि बोब्बिडुतलि लंघिसि
हिडिदु रक्कसन्न केडहि मंडिय तुडुकि
तोडिय मेलेरिसि हेरोडल कूरुगुरिंद
पडुवलगडल तडिय तरणिय नोडि
कडुकोपदलि सदेबडिदु रक्कसन केडहि
निडिगरुळनु कोरळडियल्लि धरिसिद
सडगरद दैव कडुगलि भूर्भूव
विजयविठ्ठल पा-
ल्गडलोडिया शरणरोडेय ओडनोडने ॥6॥
एकताळ
उरि मसगे चतुर्दश धरणि तल्लणिसलु
परमेष्ठि हरसुररु सिरिदेविगे मोरे इडलु
करुणदिंदलि तन्न शरणन्न सहित निन्न
चरणक्के एरगलु परमशांतनागि
हरहिदे दयवन्नु सुररु कुसुमवरुष
करेयलु भेरि वाद्य मेरेवुत्तररे एनुत
परिपरिवालग विस्तारदिंद कैकोळ्ळुत्त
मेरेदु सुररुपद्र हरिसि बालकन
काय्द परदैव गभीरात्म विजयविठ्ठल निम्म
चरिते दुष्टरिगे भीकरवो सज्जन पाला ॥7॥
जते
प्रह्लादवरद प्रपन्न क्लेशभंजन्न
महहविषे विजयविठ्ठल नरमृगवेषा ॥8॥
---------------
श्री विजयदास विरचित
श्री दुर्गा सुळादि
दुर्गा दुर्गिये, महादुष्टजनसंहारि
दुर्गांतर्गता दुर्गे, दुर्लभे, सुलभे,
दुर्गमवागिदे निन्न महिमे, बोम्म-
भर्गादिगळिगेल्ल गुणिसिदरू
स्वर्गभूमिपाताळ समस्तव्यापुते देवि-
वर्गक्के मीरिद बलु सुंदरि.
दुर्गणादवर बाधे बहळवागिदे ताये !
दुर्गतिहारि, नानु पेळुवुदेनु ?
दुर्गंधवागिदे संसृति नोडिदरे
निर्गमन काणेनम्म, मंगळांगि !
दुर्गे, हे दुर्गे, महादुर्गे,
भूदुर्गे, विष्णुदुर्गे, दुर्जये, दुर्धर्षे, शक्ते
दुर्ग कानन गहन पर्वत घोरसर्प
गर्गरशब्द व्याघ्र करडि मृत्यु-
वर्ग भूतप्रेतपिशाच मोदलाद
दुर्गण संकट प्राप्तवागे दुर्गा
दुर्गे एंदु उच्चस्वरदिंद
निर्गळितवागि ओम्मे कूगिदरू,
स्वर्गापवर्गदल्लि हरियोडने इद्दरु,
सुर्गण जय जयवेंदु पोगळुतिरे
कर्गळिंदलि एत्ति साकुव साक्षिभूते !
नीर्गुडिदंते लोकलीले निनगे
स्वर्गंगाजनक नम्म विजयविठलनंघ्रि
दुर्गाश्रय माडि बदुकुवंते माडु ॥1॥
मट्ट ताळ
अरिदरांकुशशक्ति परशु नेगिलु खड्ग
सरसिज गदा मुद्गर चाप मार्गण
वर अभय मुसल परिपरि आयुधव
धरिसि मेरेव लकुमि ! सरसिजभव रुद्र
सरुव देवतेगळ करुणापांगदलि
निरीक्षिसि अवरवर स्वरूपसुख कोडुव
सिरिभूमिदुर्गे !
सरुवोत्तम नम्म विजयविठलनंघ्रि
परमभकुतियिंद स्मरिसुव जगज्जननि ॥2॥
त्रिविडि ताळ
स्तुति माडुवे निन्न काळि महाकाळि उ-
न्नतबाहु कराळवदने चंदिरमुखि
धृति शांति बहुरूपे रात्रि रात्रिंचरणे
स्थितिये निद्रा भद्रे भक्तवत्सले भव्ये
चतुरष्टद्विहस्ते, हस्तिगमने, अ-
द्बुतप्रभावे, प्रवासे दुर्गारण्यवासे
क्षितिभारहरणे क्षीराब्दितनये सद्-
गतिप्रदाते माये श्रीये इंदिरे रमे
दितिजातनिग्रहे निर्धूतकल्मशे
प्रतिकूलभेदे पूर्णबोधे रौद्रे
अतिशयरक्त जिह्वालोले माणिक्यमाले
जितकामे जननमरणरहिते ख्याते
घृतपात्र परमान्न तांबूलहस्ते सु-
व्रते पतिव्रते त्रिनेत्रे रक्तांबरे
शतपत्रनयने निरुतकन्ये उदयार्क-
शतकोटिसन्निभे हरि अंकसंस्थे
श्रुतिततिनुते शुक्लशोणितरहिते अ-
प्रतिहते सर्वदा संचारिणि चतुरे
चतुर कपर्दिये अंभृणि ह्री
उत्पत्तिस्थितिलयकर्ते शुभ्रे शोभनगात्रे
पतितपावने धन्ये सर्वौषधियलिद्दु
हतमाडु काडुव रोगंगळिंद
क्षितियोळु सुखदिंद बाळुव मतियित्तु
सतत कायलिबेकु दुर्गा दुर्गे,
च्युतिदूर विजयविठलरेय प्रीये
कृतांजलियिंद तलेबागि नमिसुवे ॥3॥
अट्टताळ
श्रीलक्ष्मी कमला पद्मा पद्मिनि कम-
लालये रमा वृषाकपि धन्ये वृद्धि वि-
शाले यज्ञ इंदिरे हिरण्या हरिणि
वालय सत्या नित्यानंदे त्राहि सु-
शीले, सुगंधसुंदरि, विद्याशील
सुलक्षणा देवि, नानारूप
गळिंद मेरेव मृत्युनाशे
वालग कोडु संतर सन्निधियल्लि
कालकालके एन्न भार वहिसुव तायि !
मेलुमेलु निन्न शक्ति कीर्ति
बलु केळि केळि बंदे केवल ई मन
गाळियंते परद्रव्यके पोपदु
एळाल माडदे उद्धारव माडु.
कैलासपुरदल्लि पूजेगोंब देवि,
मूलप्रकृति सर्ववर्णाभिमानिनि,
पालसागरशायि विजयविठलनोळु
लीलेयाडुव नानाभरणभूषणे पूर्णे ॥4॥
आदिताळ
गोपिनंदने मुक्ते दैत्यसंततिगे सं
तापकोडुतिप्प महाकठोरे उग्र-
रूपवैलक्षणे अज्ञानकभिमानि
तापत्रयविनाशे ओंकारे हूंकारे
पापि कंसगे भय तोरिद बाललीले
व्यापुते धर्ममार्गप्रेरके अप्राकृते !
स्वापदल्लि निन्न नेनसिद शरणर्गे
अपारवागिद्द वारिधियंते महा
आपत्तु बंदिरलु, हारि पोगोदु सप्त-
द्वीपनायके नरकनिर्लेपि तमोगुणद
व्यापार माडिसि भक्तजनर्गे पुण्य-
सोपान माडिकोडुव सौभाग्यवंते दुर्गे
प्रापुतवागि एन्न मनदलि निंदु दुःख-
कूपारदिंदलि एत्ति कडेमाडु जन्मंगळ वाणि-
सौपर्णि मोदलाद सतियरु नित्य निन्न
आपादमौळितनक भजिसि भव्यरादरु
ना पेळुवदेनु ? पांडवर मनोभीष्टे !
ई पंचभौतिकदल्लि आव साधन काणे.
श्रीपतिनाम ओंदे जिह्वाग्रदल्लि नेनेव
औपासन कोडु, रुद्रादिगळ वरदे.
तापसजनप्रिय विजयविठलरेयन
श्रीपादार्चने माळ्प श्रीभूदुर्गे वर्णत्रये ॥5॥
जोते
दुर्गे हा हे हा हा दुर्गे मंगळदुर्गे
दुर्गति कोडदिरु नम्म विजयविठलप्रिये ॥6॥
------------------------------------
श्रीजगन्नाथदास विरचित
श्रीविघ्नेश्वरसंधि
हरिकथामृतसार गुरुगळ
करुणदिंदापनितु पेळुवे
परमभगवद्भक्तरिदनादरदि केळुवुदु ॥1॥
श्रीशनंघ्रिसरोजभृंग म-
हेशसंभव मन्मनदोळु प्र-
काशिसनुदिन प्रार्थिसुवे प्रेमातिशयदिंद
नी सलहु सज्जनर वेद-
व्यासकरुणापात्र महदा-
काशपति करुणाळु कैपिडिदेम्मनुद्धरिसु ॥2॥
एकदंत इभेंद्रमुख चा-
मीकरकृतभूषणांग कृ-
पाकटाक्षदि नोडु विज्ञापिसुवे इनितेंदु
नोकनीयन तुतिसुतिप्प वि-
वेकिगळ सहवाससुखगळ
नी करुणिसुवदेमगे संतत परमकरुणदलि ॥3॥
विघ्नराजने दुर्विषयदोळु
मग्नवागिह मनव महदो-
षघ्ननंघ्रिसरोजयुगळदि भक्त्तिपूर्वकदि
लग्नवागलि नित्य नरकभ-
याग्निगळिगानंजे गुरुवर
भग्नगैसेन्नवगुणगळनु प्रतिदिवसदल्लि ॥4॥
धनप विष्वक्सेन वैद्या-
श्विनिगळिगे सरियेनिप षण्मुख-
ननुज शेषशतस्थदेवोत्तम वियद्गंगा-
विनुत विश्वोपासकने स-
न्मनदि विज्ञापिसुवे लक्ष्मी
वनितेयरसन भक्त्तिज्ञानव कोट्टु सलहुवदु ॥5॥
चारुदेष्णाह्वयनेनिसि अव-
तार माडिदे रुग्मिणीयलि
गौरियरसन वरदि उद्धटराद राक्षसर
शौरियाज्ञदि संहरिसि भू-
भारविळुहिद करुणि त्वत्पा-
दारविंदके नमिपे करुणिपुदेमगे सन्मतिय ॥6॥
शूर्पकर्णद्वय विजितकं-
दर्पशर उदितार्कसन्निभ
सर्पवरकटिसूत्र वैकृतगात्र सुचरित्र
स्वर्पितांकुशपाशकर खळ-
दर्पभंजन कर्मसाक्षिग
तर्पकनु नीनागि तृप्तिय बडिसु सज्जनर ॥7॥
खेश परमसुभक्त्तिपूर्वक
व्यासकृतग्रंथगळनरितु प्र-
यासविल्लदे बरेदु विस्तरिसिदेयो लोकदोळु
पाशपाणिये प्रार्थिसुवे उप-
देशिसेनगदरर्थगळ करु-
णासमुद्र कृपाकटाक्षदि नोडु प्रतिदिनदि ॥8॥
श्रीशनतिनिर्मलसुनाभी-
देशवस्थित रक्तश्रीगं-
धासुशोभितगात्र लोकपवित्र सुरमित्र
मूषिकासुरवहन प्राणा-
वेशयुत प्रख्यात प्रभु पू-
रैसु भक्त्तर बेडिदिष्टार्थगळ प्रतिदिनदि ॥9॥
शंकरात्मज दैत्यरिगतिभ-
यंकर गतिगळीयलोसुग
संकटचतुर्थिगनेनिसि अहितार्थगळ कोट्टु
मंकुगळ मोहिसुवे चक्रद-
रांकितने दिनदिनदि त्वत्पद-
पंकजगळिगे बिन्नयिसुवेनु पालिपुदु एम्म ॥10॥
सिद्धविद्याधर गणसमा-
राध्यचरणसरोज सर्वसु-
सिद्धिदायक शीघ्रदिं पालिपुदु बिन्नपव
बुद्धिविद्याज्ञानबल परि-
शुद्धभक्त्तिविरक्त्ति निरुतन-
वद्यन स्मृतिलीलेगळ सुस्तवन वदनदलि ॥11॥
रक्त्तवासद्वय विभूषण
उक्त्ति लालिसु परमभगव-
द्भक्त्तवर भव्यात्म भागवतादि शास्त्रदलि
सक्त्तवागलि मनवु विषयवि-
रक्त्ति पालिसु विद्वदाद्य वि-
मुक्त्तनेंदेनिसेन्न भवभयदिंदलनुदिनदि ॥12॥
शुक्रशिष्यर संहरिपुदके
शक्र निन्ननु पूजिसिदनु उ-
रुक्रम श्रीरामचंद्रनु सेतुमुखदल्लि
चक्रवर्ती धर्मराजनु
चक्रपाणिय नुडिगे भजिसिद
वक्रतुंडने निन्नोळेंतुटो ईशनुग्रहवु ॥13॥
कौरवेंद्रनु निन्न भजिसद
कारणदि निजकुलसहित सं-
हारवैदिद गुरुवर वृकोदरन गदेयिंद
तारकांतकननुज एन्न श-
रीरदोळु नी निंतु धर्म-
प्रेरकनु नीनागि संतैसेन्न करुणदलि ॥14॥
एकविंशतिमोदकप्रिय
मूकरनु वाग्मिगळ माळ्प कृ-
पाकरेश कृतज्ञ कामद कायो कैविडिदु
लेखकाग्रणि मन्मनद दु-
र्व्याकुलव परिहरिसु दयदि पि-
नाकिभार्यातनुज मृद्भव प्रार्थिसुवे निनगे ॥15॥
नित्यमंगळचरित जगदु-
त्पत्तिस्थितिलयनियमन ज्ञा-
नत्रयप्रद बंधमोचक सुमनसासुरर
चित्तवृत्तिगळंते नडेव प्र-
मत्तनल्ल सुहृज्ञनाप्तन
नित्यदलि नेनेने नेदु सुखिसुव भाग्य करुणिपुदु ॥16॥
पंचभेदज्ञानवरुपु वि-
रिंचिजनकन तोरु मनदलि
वांछितप्रद ओलुमेयिंदलि दासनेंदरिदु
पंचवक्त्रन तनय भवदोळु
वंचिसदे संतैसु विषयदि
संचरिसदंददलि माडु मनादिकरणगळ ॥17॥
एनु बेडुवदिल्ल निन्न कु-
योनिगळु बरलंजे लक्ष्मी-
प्राणपति तत्त्वेशरिंदोडगूडि गुणकार्य
ताने माडुवनेंब ई सु-
ज्ञानवने करुणिसुवदेमगे म-
हानुभाव मुहुर्मुहुः प्रार्थिसुवे इनितेंदु ॥18॥
नमो नमो गुरुवर्य विबुधो-
त्तम विवर्जितनिद्र कल्प-
द्रुमनेनिपे भजकरिगे बहुगुणभरित शुभचरित
उमेय नंदन परिहरिसहं-
ममते बुध्द्यादिंद्रियगळा-
क्रमिसि दणिसुतलिहवु भवदोळगावकालदलि ॥19॥
जयजयतु विघ्नेश ताप-
त्रयविनाशन विश्वमंगळ
जय जयतु विद्याप्रदायक वीतभयशोक
जय जयतु चार्वंग करुणा-
नयनदिंदलि नोडि जन्मा-
मय मृतिगळनु परिहरिसु भक्त्तरिगे भवदोळगे ॥20॥
कडुकरुणि नीनेंदरिदु हे-
रोडल नमिसुवे निन्नडिगे बें-
बिडदे पालिसु परमकरुणासिंधु एंदेंदु
नडुनडुवे बरुतिप्प विघ्नव
तडेदु भगवन्नाम कीर्तने
नुडिदु नुडिसेन्निंद प्रतिदिवसदलि मरेयदले ॥21॥
एकविंशति पदगळेनिसुव
कोकनद नवमालिकेय मै-
नाकितनयांतर्गतश्रीप्राणपतियेनिप
श्रीकर जगन्नाथविठ्ठल
स्वीकरिसि स्वर्गापवर्गदि
ता कोडुव सौख्यगळ भक्त्तरिगावकालदलि ॥22॥
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श्रीवादिराजगुरुसार्वभौमविरचित श्रीलक्ष्मीशोभन पद
शोभानवेन्निरे सुररोळु सुभगनिगे
शोभानवेन्नि सुगुणनिगे
शोभानवेन्निरे त्रिविक्रमरायगे
शोभानवेन्नि सुरप्रियगे ॥ शोभाने ॥
लक्ष्मीनारायणर चरणक्के शरणेंबे
पक्षिवाहन्नगेरगुवे
पक्षिवाहन्नगेरगुवे अनुदिन
रक्षिसलि नम्म वधूवरर ॥ शोभाने ॥ ॥ 1 ॥
पालसागरवन्नु लीलेयलि कडेयलु
बाले महलक्षुमि उदिसिदळु
बाले महलक्षुमि उदिसिदळादेवि
पालिसलि नम्म वधूवरर ॥ शोभाने ॥ ॥ 2 ॥
बोम्मन प्रळयदलि तन्नरसियोडगूडि
सुम्मनेयागि मलगिप्प
नम्म नारायणगू ई रम्मेगडिगडिगू
जन्मवेंबुदु अवतार ॥ शोभाने ॥ ॥ 3 ॥
कंबुकंठद सुत्त कट्टिद मंगळसूत्र
अंबुजवेरडु करयुगदि
अंबुजवेरडु करयुगदि धरिसि पी-
तांबरवुट्टु मेरेदळु ॥ 4 ॥
ओंदु करदिंद अभयवनीवळे म-
त्तोंदु कैयिंद वरगळ
कुंदिल्लदानंदसंदोह उणिसुव
इंदिरे नम्म सलहलि ॥ 5 ॥
पळेव कांचिय दाम उलिव किंकिणिगळु
नलिव कालंदुगे घलुकेनलु
नळनळिसुव मुद्दुमोगद चेलुवे लक्ष्मी
सलहलि नम्म वधूवरर ॥ 6 ॥
रन्नद मोलेगट्टु चिन्नदाभरणगळ
चेन्ने महलक्षुमि धरिसिदळे
चेन्ने महलक्षुमि धरिसिदळा देवि तन्न
मन्नेय वधूवरर सलहलि ॥ 7 ॥
कुंभकुचद मेले इंबिट्ट हारगळु
तुंबिगुरुळ मुखकमल
तुंबिगुरुळ मुखकमलद महलक्षुमि जग-
दंबे वधूवरर सलहलि ॥ 8 ॥
मुत्तिन ओलेयन्निट्टळे महलक्ष्मि
कस्तूरितिलक धरिसिदळे
कस्तूरितिलक धरिसिदळा देवि स-
र्वत्र वधूवरर सलहलि ॥ ॥ 9 ॥
अंबुजनयनगळ बिंबाधरद शशि
बिंबदंतेसेव मूगुतिमणिय शशि-
बिंबदंतेसेव मूगुतिमणिय महलक्षुमि
उंबुदकीयलि वधूवरर्गे ॥ 10 ॥
मुत्तिनक्षतेयिट्टु नवरत्नद मुकुटव
नेत्तिय मेले धरिसिदळे
नेत्तिय मेले धरिसिदळा देवि तन्न
भक्तिय जनर सलहलि ॥ 11 ॥
कुंदमंदार जाजिकुसुमगळ वृंदव
चेंदद तुरुबिलि तुरुबिदळे
कुंदणवर्णद कोमले महलक्ष्मि कृपे-
यिंद वधूवरर सलहलि ॥ 12 ॥
एंदेंदू बाडद अरविंदमालेय
इंदिरे पोळेव कोरळल्लि
इंदिरे पोळेव कोरळल्लि धरिसिदळे अव-
ळिंदु वधूवरर सलहलि ॥ 13 ॥
देवांगपट्टेय मेलु होद्दिकेय
भावे महलक्षुमि धरिसिदळे
भावे महलक्षुमि धरिसिदळा देवि तन्न
सेवकजनर सलहलि ॥ 14 ॥
ई लक्षुमिदेविय कालुंगुर घलुकेनलु
लोलाक्षि मेल्लने नडेतंदळु
सालागि कुळ्ळिर्द सुरर सभेय कंडु
आलोचिसिदळु मनदल्लि ॥ 15 ॥
तन्न मक्कळ कुंद ताने पेळुवुदक्के
मन्नदि नाचि महलक्षुमि
तन्नामदिंदलि करेयदे ओब्बोब्बर
उन्नंत दोषगळनेणिसिदळु ॥ 16 ॥
केलवरु तलेयूरि तपगैदु पुण्यव
गळिसिद्दरेनू फलविल्ल
ज्वलिसुव कोपदि शापव कोडुवरु
ललनेयनिवरु ओलिसुवरे? ॥ 17 ॥
एल्ल शास्त्रगळोदि दुर्लभ ज्ञानव
कल्लिसि कोडुव गुरुगळु
बल्लिद धनक्के मरुळागि इब्बरु
सल्लद पुरोहितक्कोळगादरु ॥ 18 ॥
कामनिर्जितनोब्ब कामिनिगे सोतोब्ब
भामिनिय हिंदे हारिदव ॥
कामांधनागि मुनिय कामिनिगैदिदनोब्ब
कामदि गुरुतल्पगामियोब्ब ॥ 19 ॥
नश्वरैश्वर्यव बयसुवनोब्ब पर-
राश्रयिसि बाळुव ईश्वरनोब्ब
हास्यव माडि हल्लुदुरिसिकोंडवनोब्ब अ-
दृश्यांघ्रियोब्ब ओक्कण्णनोब्ब ॥ 20 ॥
मावन कोंदोब्ब मरुळागिहनु गड
हार्वन कोंदोब्ब बळलिद
जीवर कोंदोब्ब कुलगेडेंदेनिसिद
शिवनिंदोब्ब बयलाद ॥ 21 ॥
धर्म उंटोब्बनलि हेम्मेय हेसरिगे
अम्मम्म तक्क गुणविल्ल
क्षम्मेय बिट्टोब्ब नरकदलि जीवर
मर्मव मेट्टि कोलिसुव ॥ 22 ॥
खळनंते ओब्ब तनगे सल्लद भाग्यव
बल्लिदगंजि बरिगैद
दुर्लभ मुक्तिगे दूरवेंदेनिसुव पा-
ताळतळक्के इळिद गड ! ॥ 23 ॥
एल्लरायुष्यव शिंशुमारदेव
सल्लीलेयिंद तोलगिसुव
ओल्ले नानिवर नित्य मुत्तैयेंदु
बल्लवरेन्न भजिसुवरु ॥ 24 ॥
प्रकृतिय गुणदिंद कट्टुवडेदु नाना
विकृतिगोळगागि भवदल्लि
सुखदुःखवुंब बोम्मादि जीवरु
दुःखके दूरळेनिप एनगेणेये ॥ 25 ॥
ओब्बनवन मग मत्तोब्बनवन मोम्म
ओब्बनवनिगे शयनाह
ओब्बनवन पोरुव मत्तिब्बरवनिगंजि
अब्बरदलावाग सुळिवरु ॥ 26 ॥
ओब्बनावन नामकंजि बेच्चुव गड
सर्बरिगाव अमृतव
सर्बरिगाव अमृतवनुणिसुव अव-
नोब्बने निरनिष्ट निरवद्य ॥ 27 ॥
निरनिष्ट निरवद्य एंब श्रुत्यर्थव
ओरेदु नोडलु नरहरिगे
नरकयातने सल्ल दुरितातिदूरनिगे
मरुळ मन बंदंते नुडियदिरु ॥ 28 ॥
ओंदोंदु गुणगळु इद्दावु इवरल्लि
संदणिसिवे बहु दोष
कुंदेळ्ळष्टिल्लद मुकुंदने तनगेंदु
इंदिरे पतिय नेनेदळु ॥ 29 ॥
देवर्षि विप्रर कोंदु तन्नुदरदोळिट्टु
तीविर्द हरिगे दुरितव
भावज्ञरेंबरे आलदेलेय मेले
शिवन लिंगव निलिसुवरे ॥ 30 ॥
हसि-तृषे-जरे-मरण रोगरुजिनगळेंब
असुरपिशाचिगळ भयवेंब
व्यसन बरबारदु एंब नारायणगे
पशु मोदलागि नेनेयदु ॥ 31 ॥
ता दुःखियादरे सुरर रतिय कळेदु
मोदवीवुदके धरेगागि
माधव बाहने केसरोळु मुळुगिदव परर
बाधिप केसर बिडिसुवने? ॥ 32 ॥
बोम्मनालयदल्लि इद्दवगे लयवुंटे ?
जन्म लयविल्लदवनिगे ?
अम्मियनुणिसिद्द यशोदेयागिद्दळे ?
अम्म इवगे हसितृषेयुंटे ? ॥ 33 ॥
आग भक्ष्यभोज्यवित्तु पूजिसुव
योगिगळुंटे? धनधान्य
आग दोरकोंबुदे? पाक माडुव वह्नि म-
त्तागलेल्लिहुदु? विचारिसिरो ॥ 34 ॥
रोगवनीव वात पित्त श्लेष्म
आग कूडुवुदे? रमेयोडने
भोगिसुववगे दुरितव नेनेवरे?
ई गुणनिधिगे एणेयुंटे? ॥ 35 ॥
रम्मेदेवियरनप्पिकोंडिप्पुदु
रम्मेयरसगे रति काणिरो
अम्मोघवीर्यवु चलिसिदरे प्रळयदलि
कुम्मारर् याके जनिसरु ? ॥ 36 ॥
एकत्र निर्णीत शास्त्रार्थ परत्रापि
बेकेंब न्यायव तिळिदुको
श्रीकृष्णनोब्बने सर्वदोषक्के सि-
लुकनेंबोदु सलहलिके ॥ 37 ॥
एल्ल जगव नुंगि दक्किसिकोंडवगे
सल्लदु रोगरुजिनवु
बल्ल वैद्यर केळि अजीर्ति मूलवल्ल-
दिल्ल समस्त रुजिनवु ॥ 38 ॥
इंथा मूरुतिय ओळगोंब नरक बहु-
भ्रांत नीनेल्लिंद तोरिसुवेलो ?
संतेय मरुळ होगेलो निन्न मात
संतरु केळि सोगसरु ॥ 39 ॥
श्रीनारायणर जननिजनकर
नानेंब वादि नुडियेलो
जाणरदरिंदरिय मूलरूपव तोरि
श्रीनारसिंहन अवतार ॥ 40 ॥
अंबुधिय उदकदलि ओडेदु मूडिद कूर्म
एंब श्रीहरिय पितनारु ?
एंब श्रीहरिय पितनारु अदरिंद स्व-
यंभुगळेल्ल अवतार ॥ 41 ॥
देवकिय गर्भदलि देवनवतरिसिद
भाववनु बल्ल विवेकिगळु
ई वसुधेयोळगे कृष्णगे जन्मव
आव परियल्लि नुडिवेयो? ॥ 42 ॥
आवळिसुवाग यशोदादेविगे
देव तन्नोळगे हुदुगिद्द
भुवनवेल्लव तोरिद्दुदिल्लवे ?
आ विष्णु गर्भदोळगडगुवने ? ॥ 43 ॥
आनेय मानदलि अडगिसिदवरुंटे ?
अनेक कोटि अजांडव
अणुरोमकूपदलि आळ्द श्रीहरिय
जननिजठरवु ओळगोंबुदे ॥ 44 ॥
अदरिंद कृष्णनिगे जन्मवेंबुदु सल्ल
मदननिवन कुमारनु
कदनदि कणेगळ इवनेदेगेसेवने ?
सुदतेरिगिवनेंतु सिलुकुवने? ॥ 45 ॥
अदरिंद कृष्णनिगे परनारीसंगव को-
विदराद बुधरु नुडिवरे?
सदरवे ई मातु ? सर्ववेदंगळु
मुददिंद तावु स्तुतिसुववु ॥ 46 ॥
एंद भागवतद चेंदद मातनु
मंद मानव मनसिगे
तंदुको जगके कैवल्यवीव मु-
कुंदगे कुंदु कोरते सल्ल ॥ 47 ॥
हत्तु वर्षद केळगे मक्कळाटिकेयल्लि
चित्त स्त्रीयरिगे एरगुवुदे ?
अर्तियिंदर्चिसिद गोकुलद कन्येयर
सत्यसंकल्प बेरेतिद्द ॥ 48 ॥
हत्तु मत्तारु सासिर स्त्रीयरल्लि
हत्तु हत्तेनिप क्रमदिंद
पुत्रर वीर्यदलि सृष्टिसिदवरुंटे?
अर्तिय सृष्टि हरिगिदु ॥ 49 ॥
रोम रोम कूप कोटिवृकंगळ
निर्मिसि गोपालर तेरळिसिद
नम्म श्रीकृष्णनु मक्कळ सृजिसुव म-
हिम्मे बल्लवरिगे सलहलिके ॥ 50 ॥
मण्णनेके मेद्देयेंब यशोदेगे
सण्ण बायोळगे जगंगळ
कण्णारे तोरिद नम्म श्रीकृष्णन
घन्नते बल्लवरिगे सलहलिके ॥ 51 ॥
नारद-सनकादि मोदलाद योगिगळु
नारियरिगे मरुळादरे
ओरंते श्रीकृष्णनडिगडिगेरगुवरे?
आराधिसुत्त भजिसुवरे? ॥ 52 ॥
अंबुजसंभव त्रियंबक मोदलाद
नंबिदवरिगे वरवित्त
संभ्रमद सुररु एळ्ळष्टु कोपक्के
इंबिद्दवरिवन भजिसुवरे? ॥ 53 ॥
आवनंगुष्ठव तोळेद गंगादेवि
पावनळेनिसि मेरेयळे ?
जीवन सेरुव पापव कळेवळु
ई वासुदेवगे एणेयुंटे ? ॥ 54 ॥
किल्बिषविद्दरे अग्रपूजेयनु
सर्बरायर सभेयोळगे
उब्बिद मनदिंद धर्मज माडुवने ?
कोब्बदिरेलो परवादि ॥ 55 ॥
साविल्लद हरिगे नरकयातने सल्ल
जीवंतरिगे नरकदलि
नोवनीवने निम्म यमदेवनु
गोव नी हरिय गुणवरिय ! ॥ 56 ॥
नरकवाळुव यमधर्मराय तन्न
नरजन्मदोळगे पोरळिसि
मरळि तन्नरकदलि पोरळिसि कोलुवनु ?
कुरु निन्न कुहक कोळदल्लि ॥ 57 ॥
बोम्मन नूरु वरुष परियंत प्रळयदलि
सुम्मनेयागि मलगिर्द
नम्म नारायणगे हसि-तृषे-जरे-मरण दु-
ष्कर्म दुःखंगळु तोडसुवरे ? ॥ 58 ॥
रक्कसरस्त्रगळिंद गायवडेयद
अक्षयकायद सिरिकृष्ण
तुच्छ यमभटर शस्त्रकळुकुवनल्ल
हुच्च नी हरिय गुणवरिय ॥ 59 ॥
किच्च नुंगिदनु नम्म श्रीकृष्णनु
तुच्छ नरकदोळु अनलनिगे
बेच्चुवनल्ल अदरिंदिवगे नरक
मेच्चुवरल्ल बुधरेल्ल ॥ 60 ॥
मनेयल्लि क्षमेय ताळ्द वीरभट
रणरंगदल्लि क्षमिसुवने
अणुवागि नम्म हितके मनदोळगिन कृष्ण
मुनिव कालक्के महत्ताह ॥ 61 ॥
ताय पोट्टेयिंद मूलरूपव तोरि
आयुधसहित पोरवंट
न्यायकोविदरु पुट्टिदनेंबरे ?
बायिगे बंदंते बोगळदिरु ॥ 62 ॥
उट्ट पीतांबर तोट्ट भूषणंगळु
इट्ट नवरत्नद मुकुटवु
मेट्टिद कुरुह एदेयल्लि तोरिद श्री-
विठ्ठल पुट्टिदनेनबहुदे ? ॥ 63 ॥
ऋषभहंसमेषमहिषमूषकवाहनवेरि मा-
निसरंते सुळिव सुररेल्ल
एसेव देवेशानर सहसक्के मणिदरु
कुसुमनाभनिगे सरियुंटे ? ॥ 64 ॥
ओंदोंदु गुणगळु इद्दावु इवरल्लि
संदणिसिवे बहुदोष
कुंदेळ्ळष्टिल्लद मुकुंदने तनगेंदु
इंदिरे पतिय नेनेदळु ॥ 65 ॥
इंतु चिंतिसि रमे संत रामन पदव
संतोषमनदि नेनेवुत्त
संतोषमनदि नेनेवुत्त तन्न श्री-
कांतनिद्देडेगे नडेदळु ॥ 66 ॥
कंदर्पकोटिगळ गेलुव सौंदर्यद
चेंदवागिद्द चेलुवन
इंदिरे कंडु इवने तनगे पति -
येंदवन बळिगे नडेदळु ॥ 67 ॥
इत्तरद सुरर सुत्त नोडुत्त लक्ष्मि
चित्तव कोडदे नसुनगुत
चित्तव कोडदे नसुनगुत बंदु पुरु-
षोत्तमन कंडु नमिसिदळु ॥ 68 ॥
नानाकुसुमगळिंद माडिद मालेय
श्रीनारि तन्न करदल्लि
पीनकंधरद त्रिविक्रमरायन कोर-
ळिन मेलिट्टु नमिसिदळु ॥ 69 ॥
उट्ट पोंबट्टेय तोट्टाभरणगळु
इट्ट नवरत्नद मुकुटवु
दुष्टमर्दननेंब कडेय पेंडेगळ
वट्टिद्द हरिगे वधुवादळु ॥ 70 ॥
कोंबु चेंगहळेगळु ताळमद्दळेगळु
तंबटे भेरि पटहगळु
भों भों एंब शंख डोळ्ळु मौरिगळु
अंबुधिय मनेयल्लेसेदवु ॥ 71 ॥
अर्घ्य पाद्याचमन मोदलाद षोडश-
नर्घ्य पूजेयित्तनळियंगे
ओग्गिद मनदिंद धारेयेरेदने सिंधु
सद्गतियित्तु सलहेंद ॥ 72 ॥
वेदोक्तमंत्र पेळि वसिष्ठ-नारद मोद-
लाद मुनींद्ररु मुददिंद
वधूवरर मेले शोभनदक्षतेयनु
मोदवीवुत्त तळिदरु ॥ 73 ॥
संभ्रमदिंदंबरदि दुंदुभि मोळगलु
तुंबुरु नारदरु तुतिसुत्त
तुंबुरुनारदरु तुतिसुत्त पाडिदरु पी-
तांबरधरन महिमेय ॥ 74 ॥
देवनारियरेल्ल बंदोदगि पाठकरु
ओवि पाडुत्त कुणिदरु
देवतरुविन हूविन मळेगळ
श्रीवरन मेले करेदरु ॥ 75 ॥
मुत्तुरत्नगळिंद तेत्तिसिद हसेय नव-
रत्नमंटपदि पसरिसि नव-
रत्नमंटपदि पसरिसि कृष्णन
मुत्तैयरेल्ल करेदरु ॥ 76 ॥
शेषशयनने बा दोषदूरने बा
भासुरकाय हरिये बा
भासुरकाय हरिये बा श्रीकृष्ण वि-
लासदिंदेम्म हसेगे बा ॥ 77 ॥
कंजलोचनने बा मंजुळमूर्तिये बा
कुंजरवरदायकने बा
कुंजरवरदायकने बा श्रीकृष्ण नि-
रंजन नम्म हसेगे बा ॥ 78 ॥
आदिकालदल्लि आलदेलेय मेले
श्रीदेवियरोडने पवडिसिद
श्रीदेवियरोडने पवडिसिद श्रीकृष्ण
मोददिंदेम्म हसेगे बा ॥ 79 ॥
आदिकारणनागि आग मलगिद्दु
मोद जीवर तन्न उदरदलि
मोद जीवर तन्नुदरदलि इंबिट्ट अ-
नादिमूरुतिये हसेगे बा ॥ 80 ॥
चिन्मयवेनिप निम्म मनेगळल्लि ज्यो-
तिर्मयवाद पद्मदल्लि
रम्मेयरोडगूडि रमिसुव श्रीकृष्ण
नम्म मनेय हसेगे बा ॥ 81 ॥
नानावतारदलि नंबिद सुररिगे
आनंदवीव करुणि बा
आनंदवीव करुणि बा श्रीकृष्ण
श्रीनारियरोडने हसेगे बा ॥ 82 ॥
बोम्मन मनेयल्लि रन्नपीठदि कुळितु
ओम्मनदि नेहव माडुव
निर्मलपूजेय कैगोंड श्रीकृष्ण पर-
बोम्ममूरुतिये हसेगे बा ॥ 83 ॥
मुख्यप्राणन मनेयल्लि भारतियाग-
लिक्कि बडिसिद रसायनव
सक्करेगूडिद पायस सवियुव
रक्कसवैरिये हसेगे बा ॥ 84 ॥
रुद्रन मनेयल्लि रुद्राणिदेवियरु
भद्रमंटपदि कुळ्ळिरिसि
स्वाद्वन्नगळनु बडिसलु कैगोंब
मुद्दु नरसिंह हसेगे बा ॥ 85 ॥
गरुडन मेलेरि गगनमार्गदल्लि
तरतरदि स्तुतिप सुरस्त्रीयर
मेरेव गंधर्वर गानव सवियुव
नरहरि नम्म हसेगे बा ॥ 86 ॥
निम्मण्णन मनेय सुधर्मसभेयल्लि
उम्मेयरस नमिसिद
धर्मरक्षकनेनिप कृष्ण कृपेयिंद प-
रम्म मूरुतिये हसेगे बा ॥ 87 ॥
इंद्रन मनेग्होगि अदितिगे कुंडलवित्तु
अंदद पूजेय कैगोंडु
अंदद पूजेय कैगोंडु सुरतरुव
इंदिरेगित्त हरिये बा ॥ 88 ॥
निम्म नेनेव मुनिहृदयदलि नेलसिद
धर्मरक्षकनेनिसुव
सम्मतवागिद्द पूजेय कैगोंब नि-
स्सीममहिम हसेगे बा ॥ 89 ॥
मुत्तिन सत्तिगे नवरत्नद चामर
सुत्त नलिव सुरस्त्रीयर
नृत्यव नोडुव चित्रवाद्यंगळ सं-
पत्तिन हरिये हसेगे बा ॥ 90 ॥
एनलु नगुत बंदु हसेय मेले
वनिते लक्षुमियोडगूडि
अनंतवैभवदि कुळित कृष्णगे नाल्कु
दिनदुत्सवव नडेसिदरु ॥ 91 ॥
अत्तेरेनिप गंगे यमुने सरस्वति भा-
रत्ति मोदलाद सुरस्त्रीयरु
मुत्तिनाक्षतेयनु शोभनवेनुत त-
म्मर्तियळियगे तळिदरु ॥ 92 ॥
रत्नदारतिगे सुत्तमुत्तने तुंबि
मुत्तैयरेल्ल धवळद
मुत्तैयरेल्ल धवळद पदन पा-
डुत्तलेत्तिदरे सिरिवरगे ॥ 93 ॥
बोम्म तन्नरसि कूडे बंदेरगिद
उम्मेयरस नमिसिद
अम्मररेल्लरु बगेबगे उडुगोरेगळ
रम्मेयरसगे सलिसिदरु ॥ 94 ॥
सत्यलोकद बोम्म कौस्तुभरत्नवनित्त
मुक्तसुररु मुददिंद
मुत्तिन कंठीसर मुख्यप्राणनित्त
मस्तकमणिय शिवनित्त ॥ 95 ॥
तन्नरसि कूडे सविनुडि नुडिवाग व-
दन्नदल्लिद्दग्नि केडदंते
वह्निप्रतिष्ठेय माडि अवनोळगिद्द
तन्नाहुतियित्त सुररिगे ॥ 96 ॥
कोब्बिद खळरोडिसि अमृतान्न ऊटक्के
उब्बिद हरुषदि उणिसलु
उब्बिद हरुषदि उणिसबेकेंदु सिंधु
सर्बरिगेडेय माडिसिद ॥ 97 ॥
मावन मनेयल्लि देवरिगौतणव दा-
नवरु केडिसदे बिडरेंदु दा-
नवरु केडिसदे बिडरेंदु श्रीकृष्ण
देव स्त्रीवेषव धरिसिद ॥ 98 ॥
तन्न सौंदर्यदिंदन्नंतमडियाद ला-
वण्यदि मेरेव निजपतिय
हेण्णुरूपव कंडु कन्ये महलक्षुमि इव-
गन्यरेकेंदु बेरगादळु ॥ 99 ॥
लावण्यमयवाद हरिय स्त्रीवेषक्के
भावुकरेल्ल मरुळागे
मावर सुधेय क्रमदिंद बडिसि तन्न
सेवक सुररिगुणिसिद ॥ 100 ॥
नागन मेले ता मलगिद्दाग
आगले जगव जतनदि
आगले जगव जतनदि धरिसेंदु
नागबलिय नडेसिद ॥ 101 ॥
क्षुधेय कळेव नवरत्नद मालेय
मुददिंद वारिधि विधिगित्त
चदुरहारव वायुदेवरिगित्त
विधुविन कलेय शिवगित्त ॥ 102 ॥
शक्र मोदलाद दिक्पालकरिगे
सोक्किद चौदंत गजंगळ
उक्किद मनदिंद कोट्ट वरुण मदु-
मक्कळायुष्यव बेळेसेंद ॥ 103 ॥
मत्ते देवेंद्रगे पारिजातवनित्त
चित्तव सेळेवप्सरस्त्रीयर
हत्तु साविर कोट्ट वरुणदेव हरि-
भक्तिय मनदि बेळेसेंद ॥ 104 ॥
पोळेव नवरत्नद राशिय तेगेतेगेदु
उळिद अमररिगे सलिसिद
उळिद अमररिगे सलिसिद समुद्र
कळुहिदनवरवर मनेगळिगे ॥ 105 ॥
उन्नंत नवरत्नमयवाद अरमनेय
चेन्नेमगळिंद विरचिसि
तन्न अळियगे स्थिरवागि माडिकोट्टु
इन्नोंदु कडेयडि इडदंते ॥ 106 ॥
हयवदन तन्न प्रियळाद लक्षुमिगे
जयवित्त क्षीरांबुधियल्लि
जयवित्त क्षीरांबुधियल्लि श्रीकृष्ण
दयदि नम्मेल्लर सलहलि ॥ 107 ॥
ई पदन माडिद वादिराजेंद्रमुनिगे
श्रीपतियाद हयवदन
तापव कळेदु तन्न श्रीचरण स-
मीपदल्लिट्टु सलहलि ॥ 108 ॥
इंतु स्वप्नदल्लि कोंडाडिसिकोंड लक्ष्मी-
कांतन कंदनेनिसुव
संतर मेच्चिन वादिराजेंद्र मुनि
पंथदि पेळिद पदविदु ॥ 109 ॥
श्रीयरस हयवदनप्रिय वादिराज-
राय रचिसिद पदविदु
आयुष्य भविष्य दिनदिनके हेच्चुवुदु नि-
रायासदिंद सुखिपरु ॥ 110 ॥
बोम्मन दिनदल्लि ओम्मोम्मे ई मदुवे
क्रम्मदि माडि विनोदिसुव
नम्म नारायणगू ई रम्मेगडिगडिगू असु-
रम्मोहनवे नरनटने ॥ 111 ॥
मदुवेय मनेयल्लि ई पदव पाडिदरे
मदुमक्कळिगे मुदवहुदु
वधुगळिगे वालेभाग्य दिनदिनके हेच्चुवुदु
मदननय्यन कृपेयिंद ॥ 112 ॥
शोभानवेन्निरे सुररोळु सुभगनिगे
शोभानवेन्नि सुगुणनिगे
शोभानवेन्निरे त्रिविक्रमरायगे
शोभानवेन्नि सुरप्रियगे ॥ शोभाने ॥ ॥ 113 ॥
॥ इति श्रीमद्वादिराजयतिविरचित श्रीलक्ष्मीशोभनपद ॥
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आरति
शोभानवेन्निरे सुररोळु सुभगनिगे
शोभानवेन्नि सुगुणनिगे
शोभानवेन्निरे त्रिविक्रमरायगे
शोभानवेन्नि सुरप्रियगे ॥ शोभाने ॥ ॥ प ॥
हडगिनोळगिंद बंद कडु मुद्दु श्रीकृष्णगे
कडेगोलु नेण पिडिदने ॥
कडगोलु नेण पिडिदने देवकिय
तनयगारुतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
आचार्यर कैयिंद अधिकपूजेयगोंब
कांते लक्ष्मिय अरसने ॥
कांते लक्ष्मिय अरसने श्रीकृष्णगे
कांचनदारतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
मध्वसरोवरदि शुद्ध पूजेय कोंब
मुद्दु रुक्मिणियरसने ॥
मुद्दु रुक्मिणिय अरसने श्रीकृष्णगे
मुत्तिनारतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
पांडवर प्रियने चाणूरमर्दनने
सत्यभामेय अरसने ॥
सत्यभामेय अरसने श्रीकृष्णगे
नवरत्नदारतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
सोदर मावन मधुरेलि मडुहिद
तायिय सेरेय बिडिसिद ॥
तायिय सेरेय बिडिसिद हयवदन
देवगारतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
मुत्तैयरेल्लरू मुत्तिनारुति एत्ति
हत्तावतारद हयवदनग
हत्तावतारद हयवदन देवग
होस मुत्तिनारुतिय बेळगिरे ॥ शोभाने ॥
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श्रीश्रीपादराजविरचित
श्री मध्वनाम
जय जय जगत्त्राण जगदोळगे सुत्राण
अखिलगुणसद्धाम मध्वनाम ॥प॥
आव कच्चपरूपदिंदलंडोदकव
ओवि धरिसिद शेषमूरुतियनु
आववन बलविडिदु हरिय सुररैय्दुवरु
आ वायु नम्म कुलगुरुरायनु ॥1॥
आववनु देहदोळगिरलु हरि नेलेसिहनु
आववनु तोलगे हरि ता तोलगुव
आववनु देहदोळहोरगे नियामकनु
आ वायु नम्म कुलगुरुरायनु ॥2॥
करणाभिमानि सुररु देहव बिडलु
कुरुड किवुड मूकनेंदेनिसुव
परममुख्यप्राण तोलगला देहवनु
अरितु पेणवेंदु पेळ्वरु बुधजनरु ॥3॥
सुररोळगे नररोळगे सर्वभूतगळोळगे
परतरनेनिसि नियामिसि नेलेसिहनु
हरियनल्लदे बगेय अन्यरनु लोकदोळु
गुरुकुलतिलक मुख्य पवमाननु ॥4॥
त्रेतेयलि रघुपतिय सेवे माडुवेनेंदु
वातसुत हनुमंतनेंदेनिसिद
पोतभावदि तरणिबिंबक्के लंघिसिद
ईतगेणेगाणे मूर्लोकदोळगे ॥5॥
तरणिगभिमुखनागि शब्दशास्त्रव रचिसि
उरवणिसि हिंदु मुंदागि नडेद
परम पवमानसुत उदयास्तशैलगळ
भरदि ऐदिद ईतगुपमेयुंटे ॥6॥
अखिलवेदगळ सारव धरिसि मुन्निवनु
निखिलव्याकरणगळ इव पेळिद
मुखदल्लि किंचिदपशब्द इवगिल्लेंदु
मुख्यप्राणननु रामननुकरिसिद ॥7॥
तरणिसुतननु काय्दु शरधियनु नेरेदाटि
धरणिसुतेयळ कंडु दनुजरोडने
भरदि रणवने माडि गेलिदु दिव्यास्त्रगळ
उरुहि लंकेय बंद हनुमंतनु ॥8॥
हरिगे चूडामणियनित्तु हरिगळ कूडि
शरधियनु कट्टि बलु रक्कसरनु
ओरेसि रणदलि दशशिरन हुडिगट्टि ता
मेरेद हनुमंत बलवंत धीर ॥9॥
उरगबंधके सिलुकि कपिवररु मै मरेये
तरणिकुलतिलकनाज्ञेय ताळिद
गिरिसहित संजीवनव कित्तु तंदित्त
धरेयोळगे सरियुंटे हनुमंतगे ॥10॥
विजय रघुपति मेच्चि धरणिसुतेयळिगीये
भजिसि मौक्त्तिकद हारवनु पडेद
अजपदवियनु राम कोडुवेनेने हनुमंत
निजभकुतियने बेडि वरव पडेद ॥11॥
आ मारुतने भीमनेनिसि द्वापरदल्लि
सोमकुलदलि जनिसि पार्थरोडने
भीम विक्रम रक्कसर मुरिदट्टिद
आ महिम नम्म कुलगुरुरायनु ॥12॥
करदिंद शिशुभावनाद भीमन बिडलु
गिरियोडेदु शतशृंगवेंदेनिसितु
हरिगळा हरिगळिं करिगळा करिगळिं
अरेव वीरनिगे सुर-नररु सरिये ॥13॥
कुरुप गरळवनिक्के नेरेयुंडु तेगिदा
उरगगळ मेल्बिडलु अदनोरसिद
अरगिनरमनेयल्लि उरियनिक्कलु वीर
धरिसि जाह्नविगोय्द तन्ननुजर ॥14॥
अल्लिर्द बक-हिडिंबकरेंब रक्कसर
निल्लदोरेसिद लोककंटकरनु
बल्लिदसुरर गेलिदु द्रौपदिय कैविडिदु
एल्ल सुजनरिगे हरुषव तोरिद ॥15॥
राजकुलवज्रनेनिसिद मागधन सीळि
राजसूययागवनु माडिसिदनु
आजियोळु कौरवर बलव सवरुवेनेंदु
मूजगवरिये कंकण कट्टिद ॥16॥
माननिधि द्रौपदिय मनदिंगितवनरितु
दानवर सवरबेकेंदु बेग
काननव पोक्कु किर्मीरादिगळ तरिदु
मानिनिगे सौगंधिकवने तंद ॥17॥
दुरुळ कीचकनु ता द्रौपदिय चलुविकेगे
मरुळागि करकरेय माडलवना
गरडिमनेयोळु बरसि ओरेसि अवनन्वयद
कुरुपनट्टिद मल्लरनु सवरिद ॥18॥
वैरि दुश्शासनन रणदल्लि एडेगेडहि
वीर नरहरिय लीलेय तोरिद
कौरवर बल सवरि वैरिगळ नेग्गोत्ति
ओरंते कौरवन मुरिदु मेरेद ॥19॥
गुरुसुतनु संगरदि नारायणास्त्रवनु
उरवणिसि बिडलु शस्त्रव बिसुटरु
हरिकृपेय पडेदिर्द भीम हुंकारदलि
हरिय दिव्यास्त्रवनु नेरे अट्टिद ॥20॥
नारिरोदन केळि मनमरुगि गुरुसुतन
हार्‌हिडिदु शिरोरत्न कित्तु तेगेद
नीरोळगिद्द दुर्योधनन होरगेडहि
ऊरुद्वयव तन्न गदेयिंद मुरिद ॥21॥
चंडविक्रमनु गदेगोंडु रणदि भू-
मंडलदोळिदिरांत खळरनेल्ला
हिंडि बिसुटिह वृकोदरन प्रतापवनु
कंडु निल्लुवरारु त्रिभुवनदोळु ॥22॥
दानवरु कलियुगदोळवतरिसि विबुधरोळु
वेनन मतवनरुहलदनरितु
ज्ञानि ता पवमान भूतळदोळवतरिसि
माननिधि मध्वाख्यनेंदेनिसिद ॥23॥
अर्भकतनदोळैदि बदरियलि मध्वमुनि
निर्भयदि सकलशास्त्रव पठिसिद
उर्वियोळु माये बीरलु तत्त्वमार्गवनु
सर्व सुजनरिगे तोरि मेरेदा ॥24॥
सर्वेश हरि विश्व एल्ल ता पुसियेंब
दुर्वादिगळ मतवने खंडिसि
सर्वेश हरि विश्व सत्यवेंदरुहिदा
शर्वादिगीर्वाणसंततियलि ॥25॥
एकविंशति कुभाष्यगळ बेरनु तरिदु
श्रीकरार्चितनोलुमे शास्त्र रचिसि
लोकत्रयदोळिद्द सुररु आलिसुवंते
आ कमलनाभयतिनिकरकोरेद ॥26॥
बदरिकाश्रमके पुनरपियैदि व्यासमुनि
पदकेरगि अखिळवेदार्थगळनु
पदुमनाभन मुखदि तिळिदु ब्रह्मत्व
ऐदिद मध्वमुनिरायगभिवंदिपे ॥27॥
जय जयतु दुर्वादिमततिमिरमार्तांड
जय जयतु वादिगजपंचानन
जय जयतु चार्वाकगर्वपर्वतकुलिश
जय जय जगन्नाथ मध्वनाथ ॥28॥
तुंगकुल गुरुवरन हृत्कमलदोळु नेलेसि
भंगविल्लद सुखव सुजनकेल्ल
हिंगदे कोडुव नम्म मध्वांतरात्मकनु
रंगविठलनेंदु नेरे सारिरै ॥29॥
॥ श्री मध्वनाम संपूर्ण ॥
-------------------------
श्रीजगन्नाथदासविरचित फलस्तुति
सोमसूर्योपरागदि गोसहस्रगळ
भूमिदेवरिगे सुरनदिय तटदि
श्रीमुकुंदार्पणवेनुत कोट्ट फलवक्कु
ई मध्वनाम बरेदोदिदरिगे ॥1॥
पुत्ररिल्लदवरु सत्पुत्ररैदुवरु
सर्वत्रदलि दिग्विजयवहुदु सकल
शत्रुगळु केडुवरपमृत्यु बरलंजुवुदु
सूत्रनामकन संस्तुति मात्रदि ॥2॥
श्रीपादराय पेळिद मध्वनाम सं-
तापकळेदखिळ सौख्यवनीवुदु
श्रीपति जगन्नाथविठलन तोरि भव-
कूपारदिंद कडे हायिसुवुदु ॥3॥
---------------------------
श्री विजयदास विरचित
श्रीधन्वंतरि सुळादि
ध्रुव ताळ
आयु वृद्धियागुवुदु श्रेयस्सु बरुवुदु
काय निर्मलिन कारणवाहुदु.
माया हिंदागुवुदु नानारोगद बीज
बेयिसि कळेवुदु वेगादिंदा
नायि मोदलाद कुत्सित देहनि-
कायव तेत्तु दुष्कर्मदिंद
क्रीयमाण संचित भरितवागिद्द दुःख
हेयसागरदोळु बिद्दु बळलि,
नोयिसिकोंडु, नेलेगाणदे ओम्मे तन्न
बायल्लि वैद्यमूर्ति धन्वंतरि
राया राजौषधि नियामक कर्ता
श्रीयरसनेंदु तुतिसलागि
तायि ओदगि बंदु बालन्न साकिदंते
नोयगोडदे नम्मन्नु पालिपा
ध्येया देवादिगळिगे धर्मज्ञगुणसांद्र
श्रेयस्सु कोडुवनु भजकरिगे
मायामात्रदिंद जगवेल्ल व्यापिसि स-
न्न्यायवंतनागि चेष्टे माळ्प
वायुवंदित नित्य विजयविठलरेया
प्रीयनु काणो नमगे अनादिरोग कळेव ॥1॥
मट्ट ताळ
धन्वंतरि श्री धन्वंतरि एंदु
सन्नुतिसि सतताविच्छिन्न ज्ञानदिंद
निन्नव निन्नवनेंदु घन्नतियलि नेनेव
मन्नुज भुवन्नदोळु धन्यनु धन्यनेन्नि
घन्नमूरुति ओलिव विजयविठल सुप्र-
सन्न सत्यनेंदु बण्णिसु बहुविधदि ॥2॥
त्रिपुट ताळ
शशिकुलोद्भव दीर्घतमनंदन देव,
शशिवर्णप्रकाश प्रभुवे विभुवे
शशिमंडलसंस्थित कलश कलशपाणि
बिसजलोचन आश्विनेयवंद्य !
शशिगर्भभूरुह लते ताप ओडिसुव
औषधितुळसिजनक वासुदेव!
असुरनिर्जरतति नेरेदु गिरिय तंदु
मिसुकदे महोदधि मथिसलागि
नसुनगुत पुट्टिदे पीयूषघट धरिसि
असमदैववे ! निन्न महिमेगे नमो नमो
बिसजसंभव रुद्र मोदलाद देवता-
ऋषिनिकर निन्न कोंडाडुवुदु !
दशदिशदलि मेरेव विजयविठल
भिषकु असु इंद्रियंगळ रोगनिवारण ॥3॥
अट्ट ताळ
शरणु शरणु धन्वंतरि तमोगुणनाशा
शरणु आर्तजनपरिपालक, देव-
तरुवे, भवतापहरण दितिसुत-
हरण मोहकलीला परमपूरण ब्रह्म, ब्रह्म उद्धारक,
उरुपराक्रम उरुपराक्रम उरगशायि
वरकिरीट, महामणिकुंडलकर्ण,
मिरुगुव हस्तकंकण, हारपदक,
वरकांचीपीतांबर, चरणभूषा,
सिरिवत्सलांछन विजयविठलरेय
तरणिगातर ज्ञानमुद्रांकित हस्त ॥4॥
एळुवागलि, मत्ते तिरुगुवागलि,
बीळुवागलि, निंदु कुळ्ळिरुवागलि,
हेळुवागलि वार्ते केळुवागलि, करेदु
पेळुवागलि, पोगि सत्कर्म माडुवाग
बाळुवागलि, भोजन नाना षड्रस स-
म्मेळवागलि, मत्ते पुत्रादिगळोडने
खेळवागलि मनुज मरेयदे ओम्मे तन्न
नालगे कोनेयल्लि धन्वंतरि एंदु
काल अकालदल्लि स्मरिसिद मानवगे
व्याळेव्याळेगे बाहो भवबीजपरिहार
नीलमेघश्याम विजयविठलरेय
वालगकोडुवनु मुक्तर संगदल्लि ॥5॥
जते
धं धन्वंतरि एंदु प्रणवपूर्वकदिंद
वंदिसि नेनेयलु विजयविठल ओलिवा ॥
----------------
श्रीविजयदासविरचित
श्रीनरसिंहसुळादि
ध्रुवताळ
वीरसिंहने नारसिंहने दयपारा-
वारने भय निवारण निर्गुण
सारिदवर संसार वृक्षद मूल
बेररसि कीळुव बिरिदु भयंकर
घोरावतार कराळवदन अ-
घोर दुरित संहार मायाकार
क्रूर दैत्यर शोककारण उदुभव
ईरेळु भुवन सागरदोडिया
आ रौद्रनामा विजयविठ्ठल नरसिंग
वीररसातुंग कारुण्यपांग ॥1॥
मट्टताळ
मगुविन रक्कसनु हगलिरुळु बिडदे
हगेयिंदलि होय्दु नगपन्नग वनधि
गगन मिगिलाद अगणित बाधेयलि
नेगेदु ओगदु सावु बगेदु कोल्लुतिरलु
जगदवल्लभने सगुणानादिगने
निगमावंदितने पोगळिद भकुतर
तगलि तोलगनेंदू मिगे कूगुतलिरलु
युग युगदोळु दयाळुगळ देवर देव
युगादिकृते नामा विजय विठ्ठल हो, हो
युगळ करव मुगिदु मगुवु मोरेयिडलु ॥2॥
रूपक ताळ
केळिदाक्षणदल्लि लालिसि भक्तन्न
मौळिवेगदलि पालिसुवेनेंदु
ताळि संतोषव तूळि तुंबिदंते
मूलोकद पतियालयदिंद सु
शील दुर्लभनाम विजयविठ्ठल पंच-
मौळि मानव कंभ सीळि मूडिद देव ॥3॥
झंपिताळ
लट लटा लटलटा लटकिसि वनजांड
कटह पट पट पटुत्कटदि बिच्चुतिरलु
पुट पुटा पुटनेगेदु चीरि हारुत्त प-
ल्कट कटा कट कडिदु रोषदिंद
मिटि मिटि मिटने रक्ताक्षियल्लि नोडि
तटित्कोटि उर्भटगे आर्भटवागिरलु
कुटिलरहित व्यक्त विजयविठ्ठल शक्त
धिट निटिलनेत्र सुरकटकपरिपाला ॥4॥
त्रिविडिताळ
बोब्बिरिये वीरध्वनियिंद तनिगिडि
हब्बि मुंजोणि उरि होरेद्दु सुत्ते
उब्बस रविगागे, अब्जांड नडुगुतिरे
अब्दिसपुत उक्कि होरचल्लि बरुतिरे
अब्जभवादिगळु तब्बिब्बुगोंडरु
अब्बरवेनेनुत नभद गूळेयु तगिये
शब्द तुंबितु अव्याकृताकाश परियंत
निब्बर तरुगिरि जररिसलु
ओब्बरिगोशवल्लद नम्मा विजयविठ्ठल
इब्बगेयागि कंभदिंद पोरमट्ट ॥5॥
अट्टताळ
घुडि घुडिसुत कोटि सिडिलु गिरिगे बंदु
होडेदंते चीरि बोब्बिडुतलि लंघिसि
हिडिदु रक्कसन्न केडहि मंडिय तुडुकि
तोडिय मेलेरिसि हेरोडल कूरुगुरिंद
पडुवलगडल तडिय तरणिय नोडि
कडुकोपदलि सदेबडिदु रक्कसन केडहि
निडिगरुळनु कोरळडियल्लि धरिसिद
सडगरद दैव कडुगलि भूर्भूव
विजयविठ्ठल पा-
ल्गडलोडिया शरणरोडेय ओडनोडने ॥6॥
एकताळ
उरि मसगे चतुर्दश धरणि तल्लणिसलु
परमेष्ठि हरसुररु सिरिदेविगे मोरे इडलु
करुणदिंदलि तन्न शरणन्न सहित निन्न
चरणक्के एरगलु परमशांतनागि
हरहिदे दयवन्नु सुररु कुसुमवरुष
करेयलु भेरि वाद्य मेरेवुत्तररे एनुत
परिपरिवालग विस्तारदिंद कैकोळ्ळुत्त
मेरेदु सुररुपद्र हरिसि बालकन
काय्द परदैव गभीरात्म विजयविठ्ठल निम्म
चरिते दुष्टरिगे भीकरवो सज्जन पाला ॥7॥
जते
प्रह्लादवरद प्रपन्न क्लेशभंजन्न
महहविषे विजयविठ्ठल नरमृगवेषा ॥8॥
---------------
श्री विजयदास विरचित
श्री दुर्गा सुळादि
दुर्गा दुर्गिये, महादुष्टजनसंहारि
दुर्गांतर्गता दुर्गे, दुर्लभे, सुलभे,
दुर्गमवागिदे निन्न महिमे, बोम्म-
भर्गादिगळिगेल्ल गुणिसिदरू
स्वर्गभूमिपाताळ समस्तव्यापुते देवि-
वर्गक्के मीरिद बलु सुंदरि.
दुर्गणादवर बाधे बहळवागिदे ताये !
दुर्गतिहारि, नानु पेळुवुदेनु ?
दुर्गंधवागिदे संसृति नोडिदरे
निर्गमन काणेनम्म, मंगळांगि !
दुर्गे, हे दुर्गे, महादुर्गे,
भूदुर्गे, विष्णुदुर्गे, दुर्जये, दुर्धर्षे, शक्ते
दुर्ग कानन गहन पर्वत घोरसर्प
गर्गरशब्द व्याघ्र करडि मृत्यु-
वर्ग भूतप्रेतपिशाच मोदलाद
दुर्गण संकट प्राप्तवागे दुर्गा
दुर्गे एंदु उच्चस्वरदिंद
निर्गळितवागि ओम्मे कूगिदरू,
स्वर्गापवर्गदल्लि हरियोडने इद्दरु,
सुर्गण जय जयवेंदु पोगळुतिरे
कर्गळिंदलि एत्ति साकुव साक्षिभूते !
नीर्गुडिदंते लोकलीले निनगे
स्वर्गंगाजनक नम्म विजयविठलनंघ्रि
दुर्गाश्रय माडि बदुकुवंते माडु ॥1॥
मट्ट ताळ
अरिदरांकुशशक्ति परशु नेगिलु खड्ग
सरसिज गदा मुद्गर चाप मार्गण
वर अभय मुसल परिपरि आयुधव
धरिसि मेरेव लकुमि ! सरसिजभव रुद्र
सरुव देवतेगळ करुणापांगदलि
निरीक्षिसि अवरवर स्वरूपसुख कोडुव
सिरिभूमिदुर्गे !
सरुवोत्तम नम्म विजयविठलनंघ्रि
परमभकुतियिंद स्मरिसुव जगज्जननि ॥2॥
त्रिविडि ताळ
स्तुति माडुवे निन्न काळि महाकाळि उ-
न्नतबाहु कराळवदने चंदिरमुखि
धृति शांति बहुरूपे रात्रि रात्रिंचरणे
स्थितिये निद्रा भद्रे भक्तवत्सले भव्ये
चतुरष्टद्विहस्ते, हस्तिगमने, अ-
द्बुतप्रभावे, प्रवासे दुर्गारण्यवासे
क्षितिभारहरणे क्षीराब्दितनये सद्-
गतिप्रदाते माये श्रीये इंदिरे रमे
दितिजातनिग्रहे निर्धूतकल्मशे
प्रतिकूलभेदे पूर्णबोधे रौद्रे
अतिशयरक्त जिह्वालोले माणिक्यमाले
जितकामे जननमरणरहिते ख्याते
घृतपात्र परमान्न तांबूलहस्ते सु-
व्रते पतिव्रते त्रिनेत्रे रक्तांबरे
शतपत्रनयने निरुतकन्ये उदयार्क-
शतकोटिसन्निभे हरि अंकसंस्थे
श्रुतिततिनुते शुक्लशोणितरहिते अ-
प्रतिहते सर्वदा संचारिणि चतुरे
चतुर कपर्दिये अंभृणि ह्री
उत्पत्तिस्थितिलयकर्ते शुभ्रे शोभनगात्रे
पतितपावने धन्ये सर्वौषधियलिद्दु
हतमाडु काडुव रोगंगळिंद
क्षितियोळु सुखदिंद बाळुव मतियित्तु
सतत कायलिबेकु दुर्गा दुर्गे,
च्युतिदूर विजयविठलरेय प्रीये
कृतांजलियिंद तलेबागि नमिसुवे ॥3॥
अट्टताळ
श्रीलक्ष्मी कमला पद्मा पद्मिनि कम-
लालये रमा वृषाकपि धन्ये वृद्धि वि-
शाले यज्ञ इंदिरे हिरण्या हरिणि
वालय सत्या नित्यानंदे त्राहि सु-
शीले, सुगंधसुंदरि, विद्याशील
सुलक्षणा देवि, नानारूप
गळिंद मेरेव मृत्युनाशे
वालग कोडु संतर सन्निधियल्लि
कालकालके एन्न भार वहिसुव तायि !
मेलुमेलु निन्न शक्ति कीर्ति
बलु केळि केळि बंदे केवल ई मन
गाळियंते परद्रव्यके पोपदु
एळाल माडदे उद्धारव माडु.
कैलासपुरदल्लि पूजेगोंब देवि,
मूलप्रकृति सर्ववर्णाभिमानिनि,
पालसागरशायि विजयविठलनोळु
लीलेयाडुव नानाभरणभूषणे पूर्णे ॥4॥
आदिताळ
गोपिनंदने मुक्ते दैत्यसंततिगे सं
तापकोडुतिप्प महाकठोरे उग्र-
रूपवैलक्षणे अज्ञानकभिमानि
तापत्रयविनाशे ओंकारे हूंकारे
पापि कंसगे भय तोरिद बाललीले
व्यापुते धर्ममार्गप्रेरके अप्राकृते !
स्वापदल्लि निन्न नेनसिद शरणर्गे
अपारवागिद्द वारिधियंते महा
आपत्तु बंदिरलु, हारि पोगोदु सप्त-
द्वीपनायके नरकनिर्लेपि तमोगुणद
व्यापार माडिसि भक्तजनर्गे पुण्य-
सोपान माडिकोडुव सौभाग्यवंते दुर्गे
प्रापुतवागि एन्न मनदलि निंदु दुःख-
कूपारदिंदलि एत्ति कडेमाडु जन्मंगळ वाणि-
सौपर्णि मोदलाद सतियरु नित्य निन्न
आपादमौळितनक भजिसि भव्यरादरु
ना पेळुवदेनु ? पांडवर मनोभीष्टे !
ई पंचभौतिकदल्लि आव साधन काणे.
श्रीपतिनाम ओंदे जिह्वाग्रदल्लि नेनेव
औपासन कोडु, रुद्रादिगळ वरदे.
तापसजनप्रिय विजयविठलरेयन
श्रीपादार्चने माळ्प श्रीभूदुर्गे वर्णत्रये ॥5॥
जोते
दुर्गे हा हे हा हा दुर्गे मंगळदुर्गे
दुर्गति कोडदिरु नम्म विजयविठलप्रिये ॥6॥
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श्रीजगन्नाथदास विरचित
श्रीविघ्नेश्वरसंधि
हरिकथामृतसार गुरुगळ
करुणदिंदापनितु पेळुवे
परमभगवद्भक्तरिदनादरदि केळुवुदु ॥1॥
श्रीशनंघ्रिसरोजभृंग म-
हेशसंभव मन्मनदोळु प्र-
काशिसनुदिन प्रार्थिसुवे प्रेमातिशयदिंद
नी सलहु सज्जनर वेद-
व्यासकरुणापात्र महदा-
काशपति करुणाळु कैपिडिदेम्मनुद्धरिसु ॥2॥
एकदंत इभेंद्रमुख चा-
मीकरकृतभूषणांग कृ-
पाकटाक्षदि नोडु विज्ञापिसुवे इनितेंदु
नोकनीयन तुतिसुतिप्प वि-
वेकिगळ सहवाससुखगळ
नी करुणिसुवदेमगे संतत परमकरुणदलि ॥3॥
विघ्नराजने दुर्विषयदोळु
मग्नवागिह मनव महदो-
षघ्ननंघ्रिसरोजयुगळदि भक्त्तिपूर्वकदि
लग्नवागलि नित्य नरकभ-
याग्निगळिगानंजे गुरुवर
भग्नगैसेन्नवगुणगळनु प्रतिदिवसदल्लि ॥4॥
धनप विष्वक्सेन वैद्या-
श्विनिगळिगे सरियेनिप षण्मुख-
ननुज शेषशतस्थदेवोत्तम वियद्गंगा-
विनुत विश्वोपासकने स-
न्मनदि विज्ञापिसुवे लक्ष्मी
वनितेयरसन भक्त्तिज्ञानव कोट्टु सलहुवदु ॥5॥
चारुदेष्णाह्वयनेनिसि अव-
तार माडिदे रुग्मिणीयलि
गौरियरसन वरदि उद्धटराद राक्षसर
शौरियाज्ञदि संहरिसि भू-
भारविळुहिद करुणि त्वत्पा-
दारविंदके नमिपे करुणिपुदेमगे सन्मतिय ॥6॥
शूर्पकर्णद्वय विजितकं-
दर्पशर उदितार्कसन्निभ
सर्पवरकटिसूत्र वैकृतगात्र सुचरित्र
स्वर्पितांकुशपाशकर खळ-
दर्पभंजन कर्मसाक्षिग
तर्पकनु नीनागि तृप्तिय बडिसु सज्जनर ॥7॥
खेश परमसुभक्त्तिपूर्वक
व्यासकृतग्रंथगळनरितु प्र-
यासविल्लदे बरेदु विस्तरिसिदेयो लोकदोळु
पाशपाणिये प्रार्थिसुवे उप-
देशिसेनगदरर्थगळ करु-
णासमुद्र कृपाकटाक्षदि नोडु प्रतिदिनदि ॥8॥
श्रीशनतिनिर्मलसुनाभी-
देशवस्थित रक्तश्रीगं-
धासुशोभितगात्र लोकपवित्र सुरमित्र
मूषिकासुरवहन प्राणा-
वेशयुत प्रख्यात प्रभु पू-
रैसु भक्त्तर बेडिदिष्टार्थगळ प्रतिदिनदि ॥9॥
शंकरात्मज दैत्यरिगतिभ-
यंकर गतिगळीयलोसुग
संकटचतुर्थिगनेनिसि अहितार्थगळ कोट्टु
मंकुगळ मोहिसुवे चक्रद-
रांकितने दिनदिनदि त्वत्पद-
पंकजगळिगे बिन्नयिसुवेनु पालिपुदु एम्म ॥10॥
सिद्धविद्याधर गणसमा-
राध्यचरणसरोज सर्वसु-
सिद्धिदायक शीघ्रदिं पालिपुदु बिन्नपव
बुद्धिविद्याज्ञानबल परि-
शुद्धभक्त्तिविरक्त्ति निरुतन-
वद्यन स्मृतिलीलेगळ सुस्तवन वदनदलि ॥11॥
रक्त्तवासद्वय विभूषण
उक्त्ति लालिसु परमभगव-
द्भक्त्तवर भव्यात्म भागवतादि शास्त्रदलि
सक्त्तवागलि मनवु विषयवि-
रक्त्ति पालिसु विद्वदाद्य वि-
मुक्त्तनेंदेनिसेन्न भवभयदिंदलनुदिनदि ॥12॥
शुक्रशिष्यर संहरिपुदके
शक्र निन्ननु पूजिसिदनु उ-
रुक्रम श्रीरामचंद्रनु सेतुमुखदल्लि
चक्रवर्ती धर्मराजनु
चक्रपाणिय नुडिगे भजिसिद
वक्रतुंडने निन्नोळेंतुटो ईशनुग्रहवु ॥13॥
कौरवेंद्रनु निन्न भजिसद
कारणदि निजकुलसहित सं-
हारवैदिद गुरुवर वृकोदरन गदेयिंद
तारकांतकननुज एन्न श-
रीरदोळु नी निंतु धर्म-
प्रेरकनु नीनागि संतैसेन्न करुणदलि ॥14॥
एकविंशतिमोदकप्रिय
मूकरनु वाग्मिगळ माळ्प कृ-
पाकरेश कृतज्ञ कामद कायो कैविडिदु
लेखकाग्रणि मन्मनद दु-
र्व्याकुलव परिहरिसु दयदि पि-
नाकिभार्यातनुज मृद्भव प्रार्थिसुवे निनगे ॥15॥
नित्यमंगळचरित जगदु-
त्पत्तिस्थितिलयनियमन ज्ञा-
नत्रयप्रद बंधमोचक सुमनसासुरर
चित्तवृत्तिगळंते नडेव प्र-
मत्तनल्ल सुहृज्ञनाप्तन
नित्यदलि नेनेने नेदु सुखिसुव भाग्य करुणिपुदु ॥16॥
पंचभेदज्ञानवरुपु वि-
रिंचिजनकन तोरु मनदलि
वांछितप्रद ओलुमेयिंदलि दासनेंदरिदु
पंचवक्त्रन तनय भवदोळु
वंचिसदे संतैसु विषयदि
संचरिसदंददलि माडु मनादिकरणगळ ॥17॥
एनु बेडुवदिल्ल निन्न कु-
योनिगळु बरलंजे लक्ष्मी-
प्राणपति तत्त्वेशरिंदोडगूडि गुणकार्य
ताने माडुवनेंब ई सु-
ज्ञानवने करुणिसुवदेमगे म-
हानुभाव मुहुर्मुहुः प्रार्थिसुवे इनितेंदु ॥18॥
नमो नमो गुरुवर्य विबुधो-
त्तम विवर्जितनिद्र कल्प-
द्रुमनेनिपे भजकरिगे बहुगुणभरित शुभचरित
उमेय नंदन परिहरिसहं-
ममते बुध्द्यादिंद्रियगळा-
क्रमिसि दणिसुतलिहवु भवदोळगावकालदलि ॥19॥
जयजयतु विघ्नेश ताप-
त्रयविनाशन विश्वमंगळ
जय जयतु विद्याप्रदायक वीतभयशोक
जय जयतु चार्वंग करुणा-
नयनदिंदलि नोडि जन्मा-
मय मृतिगळनु परिहरिसु भक्त्तरिगे भवदोळगे ॥20॥
कडुकरुणि नीनेंदरिदु हे-
रोडल नमिसुवे निन्नडिगे बें-
बिडदे पालिसु परमकरुणासिंधु एंदेंदु
नडुनडुवे बरुतिप्प विघ्नव
तडेदु भगवन्नाम कीर्तने
नुडिदु नुडिसेन्निंद प्रतिदिवसदलि मरेयदले ॥21॥
एकविंशति पदगळेनिसुव
कोकनद नवमालिकेय मै-
नाकितनयांतर्गतश्रीप्राणपतियेनिप
श्रीकर जगन्नाथविठ्ठल
स्वीकरिसि स्वर्गापवर्गदि
ता कोडुव सौख्यगळ भक्त्तरिगावकालदलि ॥22॥
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